Tag: Editorial
भारतीय अर्थव्यवस्था का विरोधाभास
भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बेरोजगारी, छोटे उद्योगों की कमजोरी, महंगाई और आय असमानता विकास मॉडल की गंभीर चुनौतियों को उजागर कर रही हैं।
बदलती आबोहवा और नीतिगत उदासीनता: भारत में चरम गर्मी का संकट
भारत में बढ़ती हीटवेव अब केवल मौसमी समस्या नहीं रह गई है। चरम गर्मी देश की अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक स्वास्थ्य, श्रम व्यवस्था और सामाजिक ढांचे को प्रभावित करने वाली गंभीर चुनौती बनती जा रही है।
ट्रंप-शी मुलाकात और बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन का नया अध्याय
अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में ट्रंप और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात वैश्विक राजनीति और आर्थिक संतुलन को नई दिशा दे सकती है।
सोने-चांदी पर बढ़ा शुल्क : आर्थिक मजबूरी या संतुलित रणनीति?
सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाने का सरकार का निर्णय विदेशी मुद्रा संरक्षण की रणनीति माना जा रहा है, लेकिन इसके आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
वैश्विक संकट के बीच भारत की बढ़ती आर्थिक चुनौती
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने महंगाई, कृषि, परिवहन, रोजगार और आर्थिक विकास पर गहरा असर डाला है। यह संपादकीय देश की मौजूदा आर्थिक चुनौतियों और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की जरूरत का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
नई चुनौतियां और मानवता का भविष्य
दुनिया एक ऐसे संक्रमण काल से गुजर रही है, जहां पुरानी विश्व व्यवस्था कमजोर पड़ रही है और बहुध्रुवीय वैश्विक संरचना उभर रही है। यह संपादकीय नई चुनौतियों और मानवता के भविष्य का विश्लेषण करता है।
क्या हमारी शिक्षा प्रणाली रोजगार देने में सक्षम है? डिग्री बनाम कौशल की सच्चाई
भारत की शिक्षा प्रणाली और रोजगार के बीच बढ़ती खाई पर यह लेख गहराई से सवाल उठाता है कि क्या डिग्री वास्तव में नौकरी दिलाने में सक्षम है या नहीं।
बेमौसम बारिश और तपती धरती: जलवायु परिवर्तन की चेतावनी और मानवता की जिम्मेदारी
बेमौसम बारिश, बढ़ती गर्मी और पर्यावरण असंतुलन अब वास्तविकता बन चुके हैं। यह लेख जलवायु परिवर्तन की गंभीरता और मानव जिम्मेदारी पर प्रकाश डालता है।

