सुजानगंज के भावुपुर में मरीज का उपचार जारी, स्वास्थ्य टीम ने घर पहुंचकर किया केस सत्यापन
जौनपुर। जिले में इस वर्ष जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का पहला मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। सुजानगंज ब्लॉक के भावुपुर गांव निवासी सुशीला देवी में जापानी इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। मरीज का उपचार चल रहा है। बुधवार को जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव और महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ. जियाउल हक ने मरीज के घर पहुंचकर केस का सत्यापन किया और फॉलोअप लिया।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में मच्छर निरोधात्मक गतिविधियां भी कराईं। मच्छरों के प्रजनन स्थलों का सर्वे करने के साथ जलजमाव वाले स्रोतों को समाप्त करने, पोस्टर लगाने और पर्चे वितरित कर लोगों को बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक किया गया।
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरस जनित संक्रामक रोग है। उन्होंने बीमारी की रोकथाम के लिए जलजमाव और गंदगी को खत्म करने पर जोर दिया। नोडल अधिकारी डॉ. आलोक सिंह के अनुसार तेज बुखार, सिर व बदन दर्द, उल्टी, चक्कर, बेहोशी, शरीर में झटके, मानसिक भ्रम, बोलने में परेशानी और मुंह से झाग निकलना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। गंभीर स्थिति में मरीज कोमा या लकवे की स्थिति में पहुंच सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से घर के आसपास साफ-सफाई रखने, जलजमाव व झाड़ियों को हटाने, मच्छरदानी का इस्तेमाल करने और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनने की अपील की है। दरवाजे और खिड़कियों पर मच्छररोधी जाली लगाने तथा बच्चों को जेई का टीका लगवाने की भी सलाह दी गई है।
विभाग ने लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल जिला अस्पताल या निर्धारित चिकित्सा केंद्र ले जाने को कहा है। झोलाछाप से इलाज कराने और झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ने की सलाह दी गई है। बेहोशी या झटके की स्थिति में मरीज के मुंह में कोई वस्तु न डालने और उसे करवट लिटाने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत सफाई, जल निकासी, मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान व नियंत्रण तथा जनजागरूकता की गतिविधियां लगातार संचालित की जा रही हैं।


