- हनुमान घाट से डंडवत यात्रा कर श्रद्धालु जागेश्वर धाम रवाना, मंदिरों और शिवालयों में दिनभर लगा रहा भक्तों का तांता
जौनपुर। नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के संगम पर सोमवार को धर्मनगरी जौनपुर में आस्था का रंग गहरा नजर आया। भोर होते ही शहर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना की कामना की।
हनुमान घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी। भक्तों ने गंगा पूजन और भगवान शिव की आराधना के बाद गंगाजल भरा और विभिन्न शिवधामों के लिए रवाना हुए। कई श्रद्धालु डंडवत यात्रा करते हुए जागेश्वर धाम की ओर बढ़े। कठिन मानी जाने वाली इस यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। रास्ते में लोग हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे।
इसी क्रम में बोलबम दंडवत संघ द्वारा नागपंचमी के अवसर पर साष्टांग दंडवत यात्रा का आयोजन किया गया। यह यात्रा हनुमान घाट से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई बड़ी मस्जिद स्थित मोहल्ला आलमगंज में स्थित बाबा जागेश्वर नाथ धाम पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने विधिवत जलाभिषेक कर भगवान शिव का पूजन-अर्चन किया। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालु दंडवत करते हुए आगे बढ़ते रहे, जिससे पूरा मार्ग भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आया।
नागपंचमी के कारण इस बार शिवालयों में नाग देवता के पूजन को लेकर भी विशेष उत्साह दिखाई दिया। शहर के विभिन्न स्थानों पर सपेरों ने नाग देवता के दर्शन कराए। श्रद्धालुओं ने नाग देवता की पूजा-अर्चना की। हालांकि धार्मिक मान्यताओं के साथ वन्यजीव संरक्षण को देखते हुए सांपों को दूध पिलाने के बजाय प्रतीकात्मक पूजन और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील भी की जाती रही।
हनुमान घाट पर श्रद्धालुओं ने गंगाजल की पोटली भरी। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग त्रिलोचन महादेव और काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी के लिए रवाना हुए। सुबह से दोपहर तक घाटों और प्रमुख मार्गों पर धार्मिक यात्रा का सिलसिला बना रहा। स्थानीय दुकानों पर बेलपत्र, फूल-माला, धतूरा और पूजन सामग्री की मांग भी बढ़ी रही।
शहर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर समितियों और स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं की गईं। भीड़ वाले स्थानों पर लोगों को कतारबद्ध होकर दर्शन करने की सलाह दी गई। सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के एक साथ पड़ने से इस बार पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया, जिसके चलते जौनपुर से लेकर आसपास के शिवधामों तक श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिला।
हनुमान घाट से शुरू हुई डंडवत यात्रा
आस्था की अनूठी मिसाल पेश करते हुए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नगर के ऐतिहासिक हनुमान घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्नान और पूजा-अर्चना की। इसके बाद पवित्र जल लेकर भक्त जागेश्वर धाम के लिए रवाना हुए। इस दौरान कई श्रद्धालु बेहद कठिन डंडवत यात्रा (कनक दंडवत) करते हुए गंतव्य की ओर बढ़ते दिखे। स्वयंसेवी संगठनों द्वारा शिव भक्तों के लिए जगह-जगह चिकित्सा, पेयजल और विश्राम शिविरों की व्यवस्था की गई थी।
नाग देवता के दर्शन और लोक परंपराएं

नागपंचमी के अवसर पर सपेरों ने पारंपरिक रूप से नगर के विभिन्न चौराहों और कॉलोनियों में लोगों को जीवित नागों के दर्शन कराए। श्रद्धालुओं ने नाग देवता की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। वन्यजीव संरक्षण के मद्देनजर जीवों को नुकसान न पहुंचाने और सुरक्षित तरीके से धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील भी की गई।


