जौनपुर। पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव हत्याकांड की पड़ताल के लिए भारतीय प्रेस परिषद के सदस्य अरुण मिश्रा ने जौनपुर में दो दिन तक जांच की। इस दौरान उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर अब तक हुई कार्रवाई और जांच से जुड़े तथ्यों की जानकारी ली।
इसके बाद उन्होंने सबरहद गांव और इमरानगंज बाजार पहुंचकर घटनास्थल, विवादित जमीन तथा आसपास की स्थिति का निरीक्षण किया। प्रेस परिषद सदस्य ने मृतक पत्रकार के परिजनों और चश्मदीदों से भी बातचीत की।
13 मई 2024 को हुई थी पत्रकार आशुतोष की हत्या
13 मई 2024 को सबरहद गांव में पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में भूमि विवाद समेत अन्य पहलुओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इन्हीं बिंदुओं की पड़ताल के लिए प्रेस परिषद की ओर से अरुण मिश्रा को जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
जांच के पहले दिन अरुण मिश्रा ने डॉक बंगले में जिला प्रशासन, पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ करीब सवा घंटे बैठक की। इस दौरान उन्होंने हत्याकांड की अब तक हुई जांच, पुलिस कार्रवाई, आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई, घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और विवादित जमीन के अभिलेखों के संबंध में जानकारी ली।
राजस्व अधिकारियों से विवादित भूमि की स्थिति और उससे संबंधित रिकॉर्ड की जानकारी लेते हुए हत्या की घटना और भूमि विवाद के बीच सामने आए तथ्यों को समझने का प्रयास किया गया।
परिजनों से ली हत्याकांड से जुड़ी जानकारी
दूसरे दिन प्रेस परिषद सदस्य सबरहद गांव पहुंचे और पत्रकार आशुतोष श्रीवास्तव के आवास पर परिजनों से मुलाकात की।
इस दौरान मृतक के बड़े भाई संतोष श्रीवास्तव से घटना से पहले की परिस्थितियों, विवाद और हत्याकांड से जुड़े अन्य बिंदुओं की जानकारी ली गई।
इसके बाद वह मुख्य आरोपी बनाए गए नासिर जमाल के आवास के बाहर स्थित तालाब और नाले के आसपास पहुंचे। वहां विवादित जमीन से जुड़े तथ्यों और कब्जे से संबंधित बिंदुओं को मौके पर समझने का प्रयास किया गया।
घटनास्थल पर चश्मदीदों से पूछताछ
जांच टीम इमरानगंज बाजार स्थित उस स्थान पर भी पहुंची, जहां पत्रकार की हत्या हुई थी। प्रेस परिषद सदस्य ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां मौजूद लोगों तथा चश्मदीदों से घटना के समय की परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली।
दो दिवसीय जांच के दौरान अधिकारियों से प्राप्त रिकॉर्ड, परिजनों के बयान, चश्मदीदों की जानकारी, घटनास्थल और विवादित भूमि से जुड़े तथ्यों को एक साथ समझने का प्रयास किया गया।
अब जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी और बयानों के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट पर निगाहें हैं। पत्रकार की हत्या के मामले में परिजनों और पत्रकार संगठनों की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग पहले भी उठती रही है।


