तबादले और संबद्धता से लेकर चिकित्सा संस्थानों, मर्चरी व सरकारी उपकरणों की व्यवस्था का मुद्दा उठाया
जौनपुर। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न मामलों में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग को लेकर मंगलवार को अधिवक्ता विकास तिवारी और अतुल सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से जारी तबादले और संबद्धता आदेशों, चिकित्सा संस्थानों के संचालन, सरकारी चिकित्सकों की कथित निजी प्रैक्टिस और जिला अस्पताल की मर्चरी समेत कई मुद्दे उठाए गए।
ज्ञापन में सीएमओ कार्यालय से जारी स्थानांतरण एवं संबद्धता आदेशों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। इसके साथ ही आदेशों के अनुपालन, संबंधित कर्मचारियों की कार्यमुक्ति और उनकी वर्तमान स्थिति की भी पड़ताल कराने का अनुरोध किया गया। ज्ञापन देने वालों ने इन मामलों में कथित बिचौलियों की भूमिका की जांच किए जाने की मांग भी रखी।
चिकित्सा संस्थानों की जांच की मांग
ज्ञापन में जिले में बिना वैध पंजीकरण अथवा निर्धारित मानकों के संचालित किए जा रहे अस्पतालों, क्लीनिकों, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जांच कराने की मांग की गई है। संबंधित संस्थानों में नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया गया।
अधिवक्ताओं ने सरकारी चिकित्सकों द्वारा कथित अनधिकृत निजी प्रैक्टिस से जुड़े मामलों की भी जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष पड़ताल कर तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
मर्चरी और शव वाहनों की व्यवस्था का मुद्दा
जिला अस्पताल परिसर में उपलब्ध शव वाहनों का मुद्दा भी ज्ञापन में उठाया गया। उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर संचालित कराने तथा मर्चरी की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की गई।
मर्चरी में उपलब्ध उपकरणों, भवन की स्थिति तथा शवों के सुरक्षित और सम्मानजनक संरक्षण की व्यवस्था की उच्चस्तरीय जांच कराने का भी अनुरोध किया गया। ज्ञापन देने वालों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़े इन मामलों की स्थिति की जांच कर आवश्यक सुधार कराने की मांग रखी।
सरकारी उपकरणों की सुरक्षा की मांग
ज्ञापन में जिला अस्पताल परिसर में रखे सोलर पैनल, सर्जिकल बेड, आईसीयू उपकरण और अन्य चिकित्सकीय संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का मुद्दा भी उठाया गया। सरकारी संपत्ति को संभावित नुकसान या उसके दुरुपयोग से जुड़े मामलों की जांच कराने की मांग की गई।
ज्ञापन में पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा जांच में यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन के साथ संबंधित समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों की छायाप्रतियां भी संलग्न की गईं।
इस दौरान अंकित यादव, नीरज पाठक, चंद्रेश यादव, रंजीत यादव समेत अन्य लोग मौजूद रहे। ज्ञापन में लगाए गए आरोपों और उठाए गए मुद्दों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है।


