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55 साल का इंतजार, अब भी अधूरा आशियाना; पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहे मुसहर परिवार

जौनपुर के खुटहन ब्लॉक स्थित बड़नपुर गांव में मुसहर परिवारों को वर्ष 1972 में पट्टे की भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है।
Homeदेशशीतकालीन अवकाश के दौरान तेलंगाना के दौरे पर हैं राष्ट्रपति

शीतकालीन अवकाश के दौरान तेलंगाना के दौरे पर हैं राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शीतकालीन अवकाश के दौरान तेलंगाना के दौरे पर हैं. राष्ट्रपति 26 दिसंबर को शाम 5 बजे हैदराबाद के हाकिमपेट वायु सेना स्टेशन पहुंचीं. जहां मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. मुख्यमंत्री के साथ राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन भी राष्ट्रपति का स्वागत करने पहुंची. सीएम केसीआर ने राष्ट्रपति मुर्मू को फूलों का गुलदस्ता देकर और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया. इस मौके पर सीएम केसीआर ने मंत्रियों, सांसदों, एमएलसी, विधायकों, अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का नाम लेकर राष्ट्रपति से परिचय कराया. बता दें कि देश का प्रथम नागरिक चुनी जाने के बाद राष्ट्रपति मुर्मू पहली बार तेलंगाना पहुंची हैं. 

राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति 27 दिसंबर को हैदराबाद में ‘केशव मेमोरियल एजुकेशनल सोसाइटी’ के छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करेंगी.” इसी दिन वह सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी का दौरा करेंगी और वहां भारतीय पुलिस सेवा (74वें आरआर बैच) के प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित करेंगी. राष्ट्रपति मुर्मू 28 दिसंबर को भद्राचलम में स्थित श्री सीताराम चंद्र स्वामीवरी देवस्थानम का दौरा करेंगी और ‘प्रसाद’ योजना के तहत भद्राचलम मंदिर में पर्यटन के विकास के लिए बुनियादी ढांचे की आधारशिला रखेंगी. वह तेलंगाना वनवासी कल्याण परिषद की ओर से आयोजित ‘सम्मक्का सरलाम्मा जनजाति पुजारी सम्मेलन’ का भी उद्घाटन करेंगी. राष्ट्रपति हैदराबाद के जुड़वा शहर सिकंदराबाद के बोलारम में राष्ट्रपति निलयम में रुकेंगी, जो राष्ट्रपति का आधिकारिक रीट्रीट है. बता दें कि राष्ट्रपति साल में कम से कम एक बार राष्ट्रपति निलयम में रुकते हैं और यहीं से आधिकारिक कामकाज करते हैं. इसका निर्माण 1860 में सिकंदराबाद में ब्रिटिश रेजिडेंट के कंट्री हाउस के रूप में किया गया था. 1948 में हैदराबाद राज्य के भारत में विलय के बाद, यह राष्ट्रपति का आवास बन गया. इस प्रकार यह दिल्ली में राष्ट्रपति भवन और शिमला में राष्ट्रपति निवास के बाद राष्ट्रपति का तीसरा आधिकारिक निवास है.