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मासूमों का भविष्य दांव पर: जौनपुर के प्री-स्कूलों में नियमों की धज्जियां, सुरक्षा और सुविधाओं का अभाव

जौनपुर: शहर के गली-कूचों में संचालित प्री-स्कूल और किंडरगार्टन अब शिक्षा के केंद्र कम और भीड़भाड़ वाले केंद्र अधिक बनते जा रहे हैं। भारी फीस वसूलने के बावजूद इन संस्थानों में न तो सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं और न ही तय मानकों का पालन किया जा रहा है।

शिक्षक-छात्र अनुपात में भारी गड़बड़ी

रुहट्टा स्थित ‘आर्य वंडर’ जैसे स्कूलों से सामने आई जानकारी चौंकाने वाली है। अभिभावकों के मुताबिक, यहां 35 से 40 छोटे बच्चों की जिम्मेदारी केवल एक शिक्षक पर है, जबकि राष्ट्रीय अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ECCE) के अनुसार यह अनुपात 1:20 होना चाहिए। ऐसे में बच्चों को व्यक्तिगत ध्यान मिलना मुश्किल हो जाता है।

चमक-धमक के पीछे बदहाली

‘बचपन’ जैसे ब्रांडेड प्री-स्कूल बाहर से आकर्षक दिखते हैं और ‘मूवी रूम’ जैसी सुविधाओं का दावा करते हैं, लेकिन अंदरूनी हालात काफी खराब बताए जा रहे हैं। बारिश के मौसम में छत टपकने और जर्जर बिल्डिंग जैसी समस्याएं आम हैं।

हाइजीन और सुरक्षा पर सवाल

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के टॉयलेट और साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है, जो सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

जिम्मेदार मौन, अभिभावक परेशान

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन इन स्कूलों का निरीक्षण करता है? नियमों के अनुसार, हर स्कूल में सुरक्षित भवन और बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य हैं, लेकिन कई संस्थान सिर्फ दिखावे और मुनाफे पर ध्यान दे रहे हैं।

सख्त कार्रवाई की मांग

स्थानीय अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाए और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेता है।

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