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55 साल का इंतजार, अब भी अधूरा आशियाना; पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहे मुसहर परिवार

जौनपुर के खुटहन ब्लॉक स्थित बड़नपुर गांव में मुसहर परिवारों को वर्ष 1972 में पट्टे की भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है।
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गोवर्धन पर्वत की तरह चित्रकूट के इस पर्वत की भी लगाई जाती है प्रक्रिमा

चित्रकूट. चित्रकूट में एक ऐसा पर्वत है जिसे विश्व का अलौकिक पर्वत कहा जाता है. इस पर्वत की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. मान्यताओं के मुताबिक, इस पर्वत को स्वयं प्रभु राम ने वरदान दिया था. चित्रकूट में कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा लगाने के लिए लोग देश-विदेश से यहां पर पहुंचते हैं. कामदगिरि पर्वत आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है. लोग यहां पर कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा लगाते हैं और मन्नतें भी मांगते हैं. चित्रकूट के महंत मदन गोपालदास जी बताते हैं कि ये वही पर्वत है जब प्रभु राम अपना वनवास काल पूरा करके अयोध्या के लिए जा रहे थे. तब यह पर्वत प्रभु राम को रोकने लगा और रोने लगा. ऐसे में प्रभु राम ने पूछा आखिर क्या वजह है कि तुम रो रहे हो तो पर्वतराज ने कहा कि अब आप जा रहे हैं तो इस पर्वत को कौन देखेगा और कौन आएगा. तभी प्रभु राम ने कहा कि मैं वरदान देकर जाता हूं कि जो भी चित्रकूट धाम आएगा. वह जब तक इस पर्वत की परिक्रमा और दर्शन नहीं करेगा, तब तक उसकी यात्रा चित्रकूट में पूरी नहीं होगी. तब से इस स्थान का नाम कामदगिरि पर्वत के नाम से जाना जाता है, जो विश्व में एक अलग यह पर्वत जाना जाता है. चित्रकूट के वरिष्ठ जानकार आलोक सिंह बताते हैं कि यह पर्वत विश्व में प्रसिद्ध है, क्योंकि पर्वत के साथ-साथ भगवान की आस्था और प्रभु राम का दिया हुआ वरदान इससे जुड़ा हुआ है.  इस पर्वत के दर्शन करने से मन की इच्छा पूरी होती है. अमावस्या पर लाखों की तादाद में श्रद्धालु चित्रकूट में पहुंचकर कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा लगाकर अपनी यात्रा को सफल बनाते हैं.