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“क्या जौनपुर के ड्रीमलैंड मेले में हो सकता है बड़ा हादसा? जांच में खामियां, फिर भी आधी रात तक चल रहे झूले”

जौनपुर। शहर के जेसीस चौराहे के समीप बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित ड्रीमलैंड मेला जौनपुर इन दिनों भारी भीड़ आकर्षित कर रहा है। श्रीनगर स्टेशन, लाल चौक और वंदे भारत एक्सप्रेस के मॉडल देखने के लिए प्रतिदिन हजारों लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन मेले की चमक-दमक के पीछे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन ने मेले और झूलों के संचालन के लिए रात 10 बजे तक की समय सीमा तय की थी। इसके बावजूद कई झूले रात 11:30 बजे से लेकर आधी रात तक संचालित किए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अधिक कमाई के लिए प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी की जा रही है।

रात 10 बजे की डेडलाइन, झूले चल रहे आधी रात तक

स्थानीय लोगों के अनुसार मेले में कई झूले निर्धारित समय सीमा के बाद भी लगातार चलाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देर रात कर्मचारियों की थकान, कम दृश्यता और सुरक्षा निगरानी में कमी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

पीडब्ल्यूडी जांच में सामने आई थीं गंभीर खामियां

हाल ही में हुई पीडब्ल्यूडी जांच और प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान कई झूलों में तकनीकी कमियां सामने आई थीं। जांच में जंग लगे नट-बोल्ट, ढीली विद्युत वायरिंग, सुरक्षा बैरिकेडिंग की कमी और क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने जैसी गंभीर खामियां दर्ज की गई थीं।

जांच टीम ने अप्रशिक्षित ऑपरेटरों द्वारा झूले संचालित किए जाने पर भी आपत्ति जताई थी और तत्काल सुधार के निर्देश दिए थे।

सुरक्षा मानकों पर उठ रहे सवाल

नियमों के अनुसार मेले में संचालित प्रत्येक झूले के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट, फायर सेफ्टी उपकरण और प्राथमिक उपचार सुविधा अनिवार्य होती है। निरीक्षण में कई व्यवस्थाएं अधूरी पाए जाने के बावजूद मेले में बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

शोर और तेज आवाज से परेशान स्थानीय लोग

ड्रीमलैंड मेले के आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि देर रात तक चलने वाले झूले और तेज ध्वनि वाले साउंड सिस्टम के कारण बुजुर्गों, छात्रों और बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों ने प्रशासन से समय सीमा का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है।

बड़ा सवाल: हादसे के बाद होगी कार्रवाई या पहले?

प्रशासन पहले ही चेतावनी दे चुका है कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने पर झूलों को सील करने, लाइसेंस निरस्त करने और एफआईआर दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद यदि देर रात तक झूले संचालित हो रहे हैं तो यह प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की सक्रियता पर सवाल खड़ा करता है।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए और देर रात तक चल रहे झूलों पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले ही प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।