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55 साल का इंतजार, अब भी अधूरा आशियाना; पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहे मुसहर परिवार

जौनपुर के खुटहन ब्लॉक स्थित बड़नपुर गांव में मुसहर परिवारों को वर्ष 1972 में पट्टे की भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है।
Homeउत्तर प्रदेशआगरा डीएम से मारपीट करने वाला BDO फरार

आगरा डीएम से मारपीट करने वाला BDO फरार

आगरा. आगरा डीएम से अभद्रता और मारपीट करने वाले आरोपी बीडीओ अनिरुद्ध सिंह चौहान दो दिन से फरार है. रकाबगंज थाने में बीडीओ के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है. आरोपी बीडीओ को चार्ज से हटाया दिया गया है और शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है. बीडीओ का फोन पिछले 24 घंटे से बंद आ रह है. बीडीओ अनिरुद्ध सिंह चौहान पर निलंबन की गाज गिर सकती है. इसी बीच, बीडीओ की पत्नी ने मुख्यमंत्री और पुलिस कमिश्नर को पत्र भेजा है. पत्र में पति को जबरन झूठे मामले में फंसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि डीएम की ओर से गलत व्यवहार किया गया था. पुलिस बीडीओ की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है. जानकारों के मुताबिक, आरोपी बीडीओ पकड़ा भी गया तो उसे जेल भेजना मुश्किल होगा. आइये जानते हैं कि विवाद कैसे हुआ.

जानकारी के मुताबिक, डीएम से अभद्रता करने वाले बीडीओ अनिरुद्ध सिंह चौहान फर्रुखाबाद के रहने वाले हैं. 31 अक्टूबर 2021 को अनिरुद्ध को एत्मादपुर में बीडीओ के रूप में तैनाती मिली थी. छह फरवरी को उन्हें एत्मादपुर से बरौली अहीर का बीडीओ बनाया गया था. बीते शुक्रवार को जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी के कैंप ऑफिस में बैठक चल रही थी. अध्यक्षता डीएम गोस्वामी कर रहे थे. इस दौरान जब उन्होंने बरौली अहीर के बीडीओ अनिरुद्ध से नगला कली में गंदे पानी की निकासी की समस्या से संबंधित सवाल किए तो वह आक्रामक हो गए. आरोप है कि गुस्से में जिलाधिकारी से अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगे. इस पूरे मामले में सहायक विकास अधिकारी पंकज कुमार ने बीडीओ के खिलाफ थाना रकाबगंज में मुकदमा दर्ज कराया था. पुलिस सबूत इकट्ठे करने में लगी है. डीएम से अभद्रता करने वाले बरौली अहीर के बीडीओ अनिरुद्ध सिंह चौहान को अगर पुलिस पकड़ भी लेगी तो उन्हें भेज पाना मुश्किल होगा. दरअसल, एफआईआर में उन पर धारा 323 (मारपीट), धारा 504 (गाली गलौज), धारा 506 (जान से मारने की धमकी), धारा 332 (लोक सेवक को कर्तव्य से रोकना) धाराएं लगी हैं, उसमें 7 साल से कम की सजा है. सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार 7 साल से कम की सजा में थाने से जमानत देने का प्रावधान है. ऐसे में बीडीओ को जेल भेज पाना मुश्किल होगा.