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चौथी मोहर्रम पर निकले पारंपरिक जुलूस, कर्बला के शहीदों की कुर्बानियां की गईं याद

जौनपुर। मोहर्रम माह के तहत शनिवार को जौनपुर नगर में चौथी मोहर्रम की मजलिसों और पारंपरिक जुलूसों का आयोजन अकीदत, एहतराम और गमगीन माहौल के बीच किया गया। विभिन्न इमामबाड़ों में आयोजित मजलिसों में शोहदाए कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की गई, जबकि अज़ादारों ने नौहाख्वानी और मातम कर हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके साथियों की कुर्बानियों को याद किया।

नगर के सिपाह स्थित इमामबाड़ा सहेनची में आयोजित मजलिस की शुरुआत सोजखानी से हुई। इश्तेयाक हुसैन और उनके हमनवाओं ने दर्दभरे कलाम पेश कर माहौल को गमगीन बना दिया। इसके बाद जनाब समर रजा ने वाकया-ए-कर्बला पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 साथियों की कुर्बानी इंसानियत, सत्य और न्याय की रक्षा का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि कर्बला का संदेश अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। मजलिस के दौरान अज़ादारों ने शोहदाए कर्बला को पुरसा पेश किया और उनकी कुर्बानियों को याद कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

मजलिस के उपरांत सबीहे अलम, जुल्जनाह और गहवारा-ए-अली असगर का पारंपरिक जुलूस अंजुमन मासूमिया के नेतृत्व में निकाला गया। जुलूस अपने कदीमी मार्गों से गुजरते हुए इमामबाड़ा नबी साहब पहुंचा, जहां कार्यक्रम का समापन हुआ। पूरे मार्ग पर अज़ादार नौहाख्वानी और मातम करते हुए कर्बला के शहीदों को याद करते रहे।

उधर, नगर के आलमखां मोहल्ले से भी चौथी मोहर्रम का पारंपरिक जुलूस निकाला गया। बड़ी संख्या में अज़ादार ‘या हुसैन’ की सदाओं के बीच मातम करते हुए जुलूस में शामिल हुए। यह जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए अलहादी प्रेस स्थित इमामबाड़े पहुंचा, जहां मजलिस, फातिहाख्वानी और दुआ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

मोहर्रम के कार्यक्रमों को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। नगर के प्रमुख मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन की निगरानी में सभी धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए।

चौथी मोहर्रम के अवसर पर आयोजित इन कार्यक्रमों में नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में अज़ादारों ने भाग लिया और कर्बला के अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया।