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राम के वनवास और केवट संवाद का प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु

जौनपुर के बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के छठवें दिन आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास और केवट संवाद का प्रसंग सुनाया। कैकेयी के वरदान, श्रीराम के त्याग और केवट की भक्ति की कथा सुनकर श्रद्धालु भावुक हुए।
Homeदेशअमेरिका का सहयोगी ही नहीं दुनिया का महाशक्ति बनेगा भारत

अमेरिका का सहयोगी ही नहीं दुनिया का महाशक्ति बनेगा भारत

दुनिया में भारत के बढ़ते प्रभाव को लेकर अमेरिकी व्हाइट हाउस ने प्रतिक्रिया दी है. व्हाइट हाउस के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत संयुक्त राज्य अमेरिका का सहयोगी नहीं होगा, लेकिन एक और बड़ी शक्ति होगा. अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि पिछले 20 सालों में भारत अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध जितनी तेजी से मजबूत और गहरे हुए हैं, वैसा किसी भी अन्य द्विपक्षीय संबंध के साथ नहीं हुआ.

‘ऐस्पन सिक्योरिटी फोरम’ की यहां आयोजित एक बैठक में भारत को लेकर किए एक सवाल के जवाब में व्हाइट हाउस के एशिया मामलों के समन्वयक कैंपबेल ने कहा कि उनका मानना है कि 21वीं सदी में भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं. व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘‘यह एक तथ्य है कि मैंने पिछले 20 साल में अमेरिका और भारत जैसे कोई द्विपक्षीय संबंध नहीं देखे जो इतनी तेजी से गहरे एवं मजबूत हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी क्षमता का और इस्तेमाल करने की जरूरत है और प्रौद्योगिकी व अन्य मुद्दों पर एक साथ काम करते हुए लोगों के बीच आपसी संपर्क कायम करने की आवश्यकता है. कैंपबेल ने कहा, ‘‘भारत, अमेरिका का एक सहयोगी नहीं होगा. वह एक स्वतंत्र, शक्तिशाली देश बनने की इच्छा रखता है और वह एक और महान शक्ति बनकर उभरेगा. कैंपबेल ने कहा कि उनका मानना है कि यह एक ऐसा रिश्ता है, जिसमें कुछ महत्वाकांक्षा होनी चाहिए. हमें उन क्षेत्रों पर गौर करना चाहिए, जहां हम एक साथ काम कर सकते हैं. चाहे वह अंतरिक्ष हो, शिक्षा हो, जलवायु हो या टेक्नॉलॉजी. हमें इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि, अगर आप पिछले 20 सालों पर नजर डालेंगे और उन बाधाओं पर गौर करेंगे जिन्हें पार किया गया और हमारे दोनों पक्षों के बीच संबंधों की गहराई देखेंगे तो यह उल्लेखनीय है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत-अमेरिका संबंध केवल चीन को लेकर चिंता के कारण नहीं बने हैं. कैंपबेल ने कहा कि ये हमारे समाजों के बीच महत्वपूर्ण तालमेल पर आधारित हैं. कैंपबेल ने स्वीकार किया कि जब राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनके प्रशासन ने क्वाड को नेता स्तर पर ले जाने का फैसला किया, तो भारतीय अस्पष्ट थे. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका समुद्री डोमेन जागरूकता और शिक्षा में, COVID-19 वैक्सीन वितरण में पहल के प्रमुख सेट पर अपने भारतीय भागीदारों के साथ बहुत रचनात्मक रूप से काम कर रहा है.