रामकथा के छठवें दिन आचार्य शांतनु महाराज ने सुनाई कैकेयी के वरदान से गंगा पार कराने तक की कथा
जौनपुर। भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के छठवें दिन आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास, माता सीता और लक्ष्मण के साथ वनगमन तथा केवट संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के त्याग, मर्यादा और भक्त के प्रति प्रेम के प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
आचार्य शांतनु महाराज ने बताया कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं। इसी बीच मंथरा ने रानी कैकेयी को उनके पुराने दो वरदान याद दिलाए। इसके बाद कैकेयी ने राजा दशरथ से भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ व्यथित हो गए, लेकिन वचन से बंधे होने के कारण विवश रहे।
महाराज ने कहा कि श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए राजसुख का त्याग कर वन जाने का निर्णय लिया। माता सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वन जाने के लिए तैयार हो गए। राम वनगमन का प्रसंग सुनकर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो गए।
केवट संवाद से दिया भक्ति और समर्पण का संदेश
कथा के दौरान गंगा तट पर भगवान श्रीराम और केवट के संवाद का भी वर्णन किया गया। आचार्य ने बताया कि केवट ने प्रभु के चरण धोने के बाद ही उन्हें नाव पर बैठाने की विनती की। भगवान श्रीराम ने उसकी भावना का सम्मान करते हुए उसकी बात स्वीकार कर ली। इस प्रसंग के माध्यम से विनम्रता, भक्ति और समर्पण का संदेश दिया गया।
कथा श्रवण के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायत राज्यमंत्री ओमप्रकाश राजभर, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, पिंडरा विधायक अवधेश सिंह, जफराबाद के पूर्व विधायक डॉ. हरेंद्र देव सिंह, सिरकोनी ब्लॉक प्रमुख बंशराज सिंह, टीडी कॉलेज के डॉ. जेपी सिंह, अनुज सिंह गोधना, भुवनेश्वर सिंह, दीपक सिंह, शिवा सिंह और सुनील सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


