नई दिल्ली। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा रविवार को पटना के गांधी मैदान में छात्र संसद का आयोजन किया गया था, जहां काफी बवाल हुआ। पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया। प्रशासन का कहना है कि प्रशांत किशोर ने इजाजत नहीं ली थी। वहीं पीके ने कहा कि ‘गांधी मैदान किसी के पिताजी का तो है नहीं, जो उन्हें इजाजत लेनी पड़ा। बता दें कि बीपीएससी री-एग्जाम की मांग को लेकर अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशांत किशोर पर छात्रों को उकसाने के आरोप लग रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा, ‘मैं किसी प्रदर्शन में शामिल नहीं होता हूं। पहले 10 दिन तक छात्रों के प्रदर्शन में शामिल नहीं था। मेरा मानना था कि सरकार और छात्र का मामला है, उसी स्तर पर बात होनी चाहिए। हम इसलिए शामिल हुए क्योंकि 5 दिन पहले प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने दौड़ाकर मारा। गरीब घर से आने वाले एक बच्चे सोनू यादव ने आत्महत्या भी कर ली। इसके बाद मुझे लगा कि हमें उनके साथ खड़ा होना चाहिए। धरने पर बैठे छात्रों पर गलत एफआईआर नहीं होनी चाहिए। इसीलिए मैंने धरना स्थल पर जाने का निर्णय किया था। हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। प्रशासन की इजाजत न मिलने के सवाल पर प्रशांत किशोर ने भड़कते हुए कहा, ‘कहीं पांच हजार बच्चों को मिलना है, तो वह कहां मिलेंगे। किस बच्चे के पास इतनी खुली जगह है कि जहां पांच बच्चे मिल सकते हैं। गांधी मैदान सार्वजनिक जगह है। वहां पर हजारों लोग रोज टहलने आते हैं। अगर उतने बड़े गांधी मैदान के एक कोने में पांच हजार छात्र मिलकर बात कर रहे हैं, तो उसके लिए किस परमिशन की जरूरत है? और क्यों परमिशन की जरूरत होनी चाहिए। गांधी मैदान किसी के पिताजी का तो है नहीं। बिहार के लोगों का है। बिहार के उन लोगों का है, जो शांतिपूर्वक प्रदर्शन करना चाहते हैं।
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ध्वनि प्रदूषण: विकास की शोर में दम तोड़ती शांति और सेहत
ध्वनि प्रदूषण आज एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुका है। जौनपुर जैसे शहरों में ट्रैफिक, लाउडस्पीकर और अनियंत्रित शोर लोगों की मानसिक शांति और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं।
प्रशांत किशोर बोले : गांधी मैदान किसी के पिताजी का तो है नहीं…

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