जौनपुर। संत निरंकारी मिशन के तत्वावधान में मड़ियाहूं पड़ाव स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित जोन स्तरीय निरंकारी बाल समागम में बच्चों और युवाओं को आध्यात्म, नैतिक मूल्यों तथा श्रेष्ठ संस्कारों से जोड़ने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लखनऊ से आए केंद्रीय ज्ञान प्रचारक जी.एस. तिवारी ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही बाल संगत से जोड़ना आवश्यक है, क्योंकि यही उनके व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण की मजबूत नींव रखती है।
संस्कारवान बच्चे बनते हैं समाज की ताकत
जी.एस. तिवारी ने कहा कि बाल संगत के माध्यम से बच्चों का आध्यात्मिक, नैतिक और सार्वभौमिक विकास होता है। उनमें प्रेम, नम्रता, सहनशीलता और भाईचारे जैसे गुण विकसित होते हैं, जो उन्हें भविष्य में एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे स्वभाव से निष्कपट होते हैं। यदि उन्हें बचपन से अच्छे संस्कार और सही मार्गदर्शन मिले तो वे एक स्वस्थ, समरस और विकसित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आधुनिक तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने की सीख
उन्होंने कहा कि निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज बच्चों और युवाओं को श्रेष्ठ संस्कार देकर उन्हें परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार बनाने का कार्य कर रही हैं। समागम में बच्चों को आध्यात्म के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने, बुरी आदतों से दूर रहने तथा माता-पिता एवं बड़ों का सम्मान करने का संदेश दिया गया।
बच्चों ने दी प्रेरणादायक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने गीत, भजन, कविताएं, प्रेरक विचार और लघु नाटकों की प्रस्तुति देकर आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों का संदेश दिया। इस अवसर पर निरंकारी बाल प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें मिशन के संदेशों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
आभार ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में जोनल इंचार्ज अमरनाथ विश्वकर्मा ने बाल समागम के सफल आयोजन पर बच्चों, अभिभावकों, सेवादल अधिकारियों, युवा कल्याण विभाग के प्रतिनिधियों तथा साध संगत का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विभिन्न शाखाओं के मुखी महात्मा, संयोजक, क्षेत्रीय संचालक, शिक्षक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


