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भीषण गर्मी में बंद पड़े वाटर कूलर, पानी को तरस रहे वादकारी

जौनपुर के दीवानी न्यायालय और कलेक्ट्रेट परिसर में खराब पड़े वाटर कूलरों के कारण भीषण गर्मी में वादकारियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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खबर का असर: ‘जौनपुर धारा’ की खबर के बाद जागा प्रशासन

जौनपुर। जौनपुर की ऐतिहासिक धरोहरों और रिवर फ्रंट की बदहाल स्थिति को लेकर “जौनपुर धारा” द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित खबर का असर अब दिखाई देने लगा है। खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और मंगलवार को जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र स्वयं शाही पुल और गोमती तटों का निरीक्षण करने पहुंच गए।

रिवर फ्रंट की दुर्दशा को लेकर उठाया गया था मुद्दा

अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया था कि रिवर फ्रंट पर झाड़-झंखाड़, नशेड़ियों का जमावड़ा और रखरखाव के अभाव के कारण करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यह परियोजना बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। इस गंभीर मुद्दे को संज्ञान में लेते हुए जिलाधिकारी ने आवास एवं विकास परिषद द्वारा प्रस्तावित सौंदर्यीकरण कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान डीएम ने मौके पर मौजूद अधिशासी अभियंता प्रीति विश्वकर्मा से प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत जानकारी ली और गुणवत्तापूर्ण तरीके से कार्य शुरू करने के निर्देश दिए।

इस दौरान मुख्य राजस्व अधिकारी अजय अम्बष्ट सहित अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।

सफाई व्यवस्था को लेकर फटकार

रिवर फ्रंट पर फैली गंदगी और अव्यवस्था को लेकर जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी पवन कुमार को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि नगर क्षेत्र के साथ-साथ शाही पुल और गोमती घाटों पर नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

डीएम ने स्पष्ट कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों की उपेक्षा और गंदगी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनता की उम्मीदें जगीं

“जौनपुर धारा” द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया था कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद रिवर फ्रंट की हालत खराब है और यह स्थान पिकनिक स्पॉट के बजाय अश्लील गतिविधियों का केंद्र बनता जा रहा था।

अब डीएम के निरीक्षण और सख्त निर्देशों के बाद स्थानीय नागरिकों में एक बार फिर रिवर फ्रंट के बेहतर विकास और सौंदर्यीकरण की उम्मीद जगी है।

यह पूरा घटनाक्रम इस बात को भी साबित करता है कि जनहित के मुद्दों पर मीडिया की आवाज प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर कर सकती है।

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