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भीषण गर्मी में बंद पड़े वाटर कूलर, पानी को तरस रहे वादकारी

जौनपुर के दीवानी न्यायालय और कलेक्ट्रेट परिसर में खराब पड़े वाटर कूलरों के कारण भीषण गर्मी में वादकारियों, अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है।
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कोचिंग संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, भीषण गर्मी में छात्र बेहाल

मुंगराबादशाहपुर। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित अधिकांश कोचिंग संस्थानों में छात्रों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है। कई कोचिंग सेंटर बिना मानक और पंजीकरण के संचालित हो रहे हैं, जहां न पीने के लिए स्वच्छ पानी की व्यवस्था है, न शौचालय और न ही भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए पर्याप्त पंखे लगाए गए हैं।

छोटे-छोटे कमरों में क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाकर पढ़ाया जा रहा है, जिससे छात्रों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। नगर के विभिन्न मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे कोचिंग संस्थानों का जायजा लेने पर सामने आया कि कई सेंटरों में 50 से 60 बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। कई स्थानों पर छात्रों को पानी पीने के लिए बाहर जाना पड़ता है, जबकि छात्राओं को शौचालय की सुविधा न होने के कारण घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि कोचिंग संचालक मोटी फीस वसूलते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि गर्मी के कारण कई बार बच्चों की तबीयत खराब हो चुकी है, इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं किया जा रहा है।

जानकारों के अनुसार कोचिंग संस्थानों के संचालन के लिए पर्याप्त हवादार कमरे, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, अग्निशमन यंत्र और बैठने की समुचित व्यवस्था अनिवार्य है। कोचिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत प्रत्येक 20 छात्रों पर एक शौचालय, प्रति छात्र निर्धारित स्थान और पर्याप्त रोशनी व हवा की व्यवस्था जरूरी मानी गई है। इसके बावजूद अधिकतर संस्थानों में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ऐसे कोचिंग संस्थानों की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि छात्रों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

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