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राम के वनवास और केवट संवाद का प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु

जौनपुर के बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के छठवें दिन आचार्य शांतनु महाराज ने भगवान श्रीराम के वनवास और केवट संवाद का प्रसंग सुनाया। कैकेयी के वरदान, श्रीराम के त्याग और केवट की भक्ति की कथा सुनकर श्रद्धालु भावुक हुए।
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जौनपुर में श्रद्धा के साथ मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती

मंदिरों में रामायण पाठ, दीपदान और भक्ति कार्यक्रमों के जरिए दिया सामाजिक समरसता का संदेश

जौनपुर। महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर जिले की विभिन्न तहसीलों, विकास खंडों और ग्राम पंचायतों में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन, दीपदान, वाल्मीकि रामायण पाठ और भक्ति प्रस्तुतियों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों तथा सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया गया।

जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों ने रामायण पाठ और भक्ति गीत प्रस्तुत किए। मुख्य विकास अधिकारी नरेंद्र बहादुर सिंह ने भी मंदिर पहुंचकर कार्यक्रम में सहभागिता की। संबंधित उप जिलाधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों और अधिशासी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लिया।

विभिन्न मंदिरों में हुए धार्मिक आयोजन

जिले में शीतला चौकिया परिसर स्थित हनुमान मंदिर, छोटी काशी, शकरमंडी चुंगी के पास स्थित हनुमान मंदिर, रामजानकी मंदिर अहियापुर और मैहर देवी स्थित राम एवं हनुमान मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किए गए। मड़ियाहूं के रामजानकी मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भी श्रद्धालुओं ने रामायण पाठ और भक्ति कार्यक्रमों में सहभागिता की।

इसके अलावा तिलौरा, मुबारकपुर, सरोखनपुर और ठाकुर द्वारा में भी रामायण पाठ तथा भक्ति प्रस्तुतियां हुईं। इन कार्यक्रमों में राहुल पाठक, विजय बहादुर यादव, अजय यादव, आशुतोष यादव, अभिषेक निषाद, जगदीश यादव, अशोक कुमार यादव, राम अभिलाख, चन्दन निषाद एंड पार्टी और योगेंद्र नाथ चौबे सहित अन्य कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।

सामाजिक समरसता पर रहा जोर

आयोजनों के दौरान नगर निकायों, विकास खंडों और ग्राम पंचायतों के सहयोग से मंदिर परिसरों में साफ-सफाई तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं।

कार्यक्रमों का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि की रचनाओं और भगवान श्रीराम के आदर्शों के माध्यम से नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं को प्रोत्साहित करना रहा। विभिन्न स्थानों पर आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया।