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कागजों पर ‘नो पावर कट’, धरातल पर जनता काट रही ‘काला पानी’ जैसी सजा

जौनपुर। जनपद में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच बिजली विभाग की अव्यवस्था ने आम लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। शासन स्तर पर जिला मुख्यालय को 24 घंटे, तहसील क्षेत्रों को 21.30 घंटे और ग्रामीण इलाकों को 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर निर्धारित है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।

शहरों में प्रतिदिन 5 से 6 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से 12 घंटे तक अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। इसके अलावा लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और लोकल फाल्ट की समस्याओं ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। भीषण उमस और गर्मी के बीच पूरा जिला बिजली संकट से जूझ रहा है।

बताया जा रहा है कि बिजली विभाग के वर्कशॉपों में जले हुए ट्रांसफार्मरों के ढेर लगे हुए हैं। विभागीय अधिकारी लगातार ओवरलोड का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर जनता को घंटों अंधेरे और गर्मी में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

शिकायत करने पर भी नहीं मिल रही राहत

उपभोक्ताओं की परेशानी उस समय और बढ़ जाती है जब रात के समय बिजली आपूर्ति बाधित होने पर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की जाती है। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों के सीयूजी नंबर या तो बंद रहते हैं या फोन रिसीव नहीं किए जाते।

कई उपभोक्ताओं का कहना है कि कुछ अधिकारियों ने अपने नंबर कंट्रोल रूम या सब-स्टेशन पर फॉरवर्ड कर दिए हैं, जहां से केवल औपचारिक जवाब देकर लोगों को टाल दिया जाता है। इससे लोगों में बिजली विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखी जा रही है।

प्रीपेड मीटर और पानी संकट ने बढ़ाई मुश्किल

हाल ही में लागू की गई स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था भी लोगों की परेशानी का कारण बनती जा रही है। तकनीकी खामियों और सिस्टम की गड़बड़ियों के कारण कई उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिना पूर्व सूचना के काट दिए गए।

उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग पहले से एडवांस भुगतान ले रहा है, इसके बावजूद उन्हें लगातार बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। बिजली कटौती का असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। घरों के इनवर्टर जवाब दे चुके हैं, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बुजुर्ग एवं बीमार लोग सबसे अधिक परेशान हैं।

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