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पटाखा दुकानों पर पुलिस की छापेमारी, लाइसेंस और स्टॉक की जांच

दीपावली से पहले पट्टी नरेंद्रपुर बाजार में पुलिस ने पटाखा दुकानों की जांच की। लाइसेंस, स्टॉक और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण किया गया। जांच में अवैध भंडारण नहीं मिला। पुलिस ने नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी।
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बिजली दफ्तर के करीब ही धूल फांक रही लाखों की 11 हजार वोल्ट केबल

सालों से सड़क किनारे पड़े हैं केबल के बंडल, ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

जौनपुर। सरकारी धन से खरीदी गई लाखों रुपये की 11 हजार वोल्ट की विद्युत केबल वर्षों से सड़क किनारे पड़ी है, लेकिन इसका उपयोग नहीं हो सका है। हैरानी की बात यह है कि केबल बिजली विभाग के मुख्य कार्यालय हाइडिल से कुछ ही दूरी पर रखी हुई है। इसके बावजूद इसकी सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। स्थानीय लोगों ने इसे सरकारी संपत्ति की अनदेखी बताते हुए विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, केबल की खरीद अंडरग्राउंड विद्युत लाइन बिछाने अथवा बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए की गई थी। आरोप है कि ठेकेदार ने संबंधित कार्य पूरा नहीं कराया और केबल के बंडल सड़क किनारे छोड़ दिए। लोगों का कहना है कि यदि परियोजना अधूरी है तो अब तक ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

लंबे समय तक खुले में पड़े रहने से केबल के इंसुलेशन को धूप और बारिश से नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से इसकी चोरी या क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी बना हुआ है। सड़क किनारे रखे भारी केबल बंडल राहगीरों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिजली विभाग के प्रमुख कार्यालय के नजदीक वर्षों से पड़ी इस संपत्ति की निगरानी क्यों नहीं हो सकी। स्थानीय लोगों ने परियोजना की तकनीकी जांच कराने, कार्य की वास्तविक प्रगति और भुगतान का विवरण सार्वजनिक करने तथा जिम्मेदार ठेकेदार और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

कागजों में कितना पूरा हुआ काम?

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि केबल बिछाने का काम पूरा नहीं हुआ तो ठेकेदार को भुगतान किस आधार पर किया गया? क्या विभागीय अभिलेखों में परियोजना को पूर्ण दर्शाया गया है? नागरिकों ने परियोजना की स्वीकृति, कार्यादेश, भुगतान और मौके पर हुए काम की स्थिति की जांच कराने की मांग की है, ताकि सरकारी धन के उपयोग की वास्तविक तस्वीर सामने आ सके।

सुरक्षा के इंतजाम भी नदारद

सड़क किनारे खुले में रखे केबल के बंडलों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों को आशंका है कि लंबे समय तक इसी तरह पड़े रहने से केबल चोरी या क्षतिग्रस्त हो सकती है। उन्होंने विभाग से केबल को सुरक्षित स्थान पर रखवाने अथवा निर्धारित परियोजना में तत्काल उपयोग कराने की मांग की है।