जौनपुर धारा, जौनपुर। भाद्रपद की पूर्णिमा और अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा को पितृ पक्ष कहते हैं। सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। इस दौरान विधि-विधान और श्रद्धा भाव से पितरों की पूजा की जाती है। इस वर्ष पितृ पक्ष की शुरुआत हो गई है जिसका समापन 14 अक्टूबर तक होगा। पितृ पक्ष के दौरान पितरों को तर्पण दिया जाता है। साथ ही पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म और पिंडदान करने का भी विधान है। इस नगर के हनुमान घाट पर लोगों ने अपने पूर्वजों को विधि-विधान से पूजन कर जल अर्पण किया। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार मनुष्य को देवताओं की पूजा करने से पहले अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे देवता प्रसन्न होते हैं। इसी वजह से भारतीय समाज में बड़ों का सम्मान और मरणोपरांत पूजा की जाती है। ये प्रसाद श्राद्ध के रूप में होते हैं जो पितृपक्ष में पड़ने वाली मृत्यु तिथि को किया जाता है और यदि तिथि ज्ञात नहीं है, तो अश्विन अमावस्या की पूजा की जा सकती है जिसे सर्व प्रभु अमावस्या भी कहा जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन तालाब, नदी या अपने घर में व्यवस्था अनुसार जवा, तिल, गंगाजल, वस्त्र आदि सामग्री के द्वारा पितरों की शांति, ऋषि एवं सूर्य को प्रसन्न करने के लिए तर्पण किया जाता है। इसलिए श्रद्धा के साथ पितरों का आह्वान करना होता है। शानिवार को हनुमान घाट पर दर्जनों वंशजों ने श्राद्ध पक्ष के चलते पितरों को पानी दिया। स्थानीय पुजारी ने बताया कि मनुष्य के ऊपर तीन ऋण होते हैं। देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण।इस दौरान जिस तिथि में पूर्वजों का देहांत हो गया है उस तिथि को याद करके उनके लिए जल, फल, फूल आदि समर्पित किया गया।
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हैप्पी मॉडल स्कूल में मिशन शक्ति जागरूकता कार्यक्रम
मुंगराबादशाहपुर के हैप्पी मॉडल पब्लिक स्कूल में थाना पुलिस ने मिशन शक्ति अभियान के तहत छात्राओं को महिला सुरक्षा, आत्मरक्षा, सरकारी योजनाओं और हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी। पुलिसकर्मियों ने छात्राओं से छेड़छाड़ या उत्पीड़न की स्थिति में निडर होकर शिकायत करने की अपील की।
वंशजों ने पित्रों को याद कर अर्पण किया जल

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