अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने परमाणु शक्ति संचालित पनडुब्बी समझौते की घोषणा को चीन ने खतरनाक बताया है. साथ ही तीनों देशों पर अंतरराष्ट्रीय समुदायों की चिंताओं को पूरी तरह से अनदेखा करने का आरोप लगाया है. चीन ने कहा है कि इस एलान के बाद तीनों देश खतरे के रास्ते पर चल रहे हैं.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के ताजा बयानों से पता चलता है कि तीनों देश खुद के फायदे के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदायों की चिंताओं को पूरी तरह से दरकिनार कर रहे हैं. गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को घोषणा की है कि वह पांच अमेरिकी परमाणु-संचालित पनडुब्बियों को खरीदेगा. इसके साथ ही एक महत्वाकांक्षी योजना के तहत अमेरिका और ब्रिटिश तकनीक के साथ एक नए मॉडल का निर्माण करेगा. इससे वह एशिया-प्रशांत में चीनी दखल के बीच पश्चिमी ताकत को मजबूत करेगा. दरअसल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने सोमवार (13 मार्च )को परमाणु शक्ति संचालित पनडुब्बी समझौते ऑकस (AUKUS) की घोषणा की थी. अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने सोमवार को अमेरिका के सैन डिएगो में एक शिखर सम्मेलन के बाद यह ऐलान किया था. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने जोर देकर कहा है कि यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र व मुक्त रखने के लिए उठाया गया है. 2030 के दशक की शुरुआत में अमेरिका तीन वर्जीनिया-श्रेणी की पनडुब्बियों को ऑस्ट्रेलिया को बेचेगा, अगर जरूरत हुई तो दो और पनडुब्बियां बेचेगा. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन पर हथियारों की होड़ को उकसाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सुरक्षा सौदा साफ तौर पर शीत युद्ध की मानसिकता को दर्शाने का मामला है. वांग ने बीजिंग में एक नियमित समाचार सम्मेलन में कहा कि परमाणु शक्ति संपन्न पनडुब्बियों की बिक्री से परमाणु प्रसार के खतरे का अंदेशा है. यह अप्रसार संधि के लक्ष्यों और उद्देश्यों का सरासर उल्लंघन है. इस समझौते को लेकर रूस ने कहा कि इससे एशिया और यूरोप में सिर्फ तनाव ही बढ़ेगा. इस समझौते के कारण पूरी दुनिया में विवाद पैदा हो सकता है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस परियोजना से किसी प्रकार का जोखिम नहीं होगा.



