जौनपुर धारा, सुइथाकला। विगत 25 अप्रैल से क्षेत्र के अरसिया में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन की कथा की शुरूआत भागवत पुराण के पूजन अर्चन और पुष्पाहार से हुआ। व्यास गद्दी पर विराजमान कथावाचक स्वामी चिन्मयानन्द बापू ने कथा के तीसरे दिन भागवत कथा के तीसरे स्कन्ध के रूप में माता देवहूति और भगवान कपिल के चरित्र के प्रसंग का वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने अज्ञानता को सभी दुखों का कारक बताया। उन्होंने कहा कि बगैर ज्ञान के शान्ति नहीं मिलती और ज्ञान भी सत्संग से मिलता है। जिस दिन सत्य का ज्ञान हो गया उसी दिन मानव के सारे दुख दूर हो जाते हैं। उन्होंने ज्ञान को ही श्रीमद्भागवत बताया, जो इसके प्रति श्रद्धावान और आस्थावान होते हैं उन्हीं को परम ज्ञान की प्राप्ति होती है। उन्होंने प्रथम स्कन्ध की चर्चा करते हुए मंगलाचरण में प्रभु का ध्यान करने का सुझाव दिया। बगैर जगदीश के जगत की कल्पना नहीं की जा सकती है। इस दौरान उन्होंने जहां कपिल चरित्र का वर्णन करते हुए लोगों में अध्यात्म योग को मोक्ष का साधन बताया। उसी के द्वारा मानव को दुख सुख से पूर्ण विश्राम मिलता है जिसके लिए तीनों गुणों सत, रज व तम से परे होकर ईश्वर के प्रति आसक्ति लानी पड़ेगी। इस दौरान सांसद बीपी सरोज, पप्पू माली, अरूण कुमार मिश्रा मुन्ना, अमित मिश्रा, प्रमुख प्रतिनिधि डॉ. उमेश चन्द्र तिवारी समेत अन्य लोग मौजूद रहे। कथा में विशिष्ट अतिथियों को श्री बापू जी द्वारा स्मृति चिन्ह देकर आशीर्वाद प्रदान किया गया। अन्त में आरती के पश्चात लोगों में प्रसाद वितरण का कार्य किया गया। आयोजक विधायक बदलापुर रमेश चन्द्र मिश्र ने आगन्तुकों के प्रति आभार प्रकट किया।
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अज्ञानता ही सभी दुखों का कारक है : स्वामी चिन्मयानन्द बापू



