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विद्यार्थियों को रोजगारपरक एवं व्यावहारिक शिक्षा दें : कुलपति

पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय की समीक्षा बैठक में कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह ने विद्यार्थियों को रोजगारपरक एवं व्यावहारिक शिक्षा देने पर जोर दिया। उन्होंने उद्योगों से एमओयू, औद्योगिक भ्रमण और विभागों की 10 वर्ष की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
Homeअपना जौनपुरश्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है चौरा मां काली का मंदिर

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है चौरा मां काली का मंदिर

  • 1823 में राजाराम ऊमरवैश्य ने कराई थी मंदिर का निर्माण

जौनपुर धारा, मुंगराबादशाहपुर। गुड़हाई मोहल्ले के मलिया घोड़ा में स्थित प्राचीन व प्रसिद्ध चौरा मां काली का मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता अवश्य पूरी करती हैं। नवरात्रों में मां के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं। चौरा मां काली का मंदिर का इतिहास लगभग 200 साल से अधिक पुराना है। मां काली के इस मंदिर में प्रसाद चढ़ाने के लिए क्षेत्र के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर में मांगी गई मुराद जरूर पूरी होती है। बुजुर्गों का कहना है कि उक्त मंदिर निर्माण के पहले इमली का पेड़ होता था इसी इमली के पेड़ के नीचे मां काली की प्रतिमा स्थापित थी जिसमें क्षेत्र के महिलाएं इमली के पेड़ के नीचे प्रसाद बनाकर भेग लगाती थी और उनकी मुरादे भी पूरी होती थी जिसको लेकर कस्बे के निवासी स्व. राजाराम ऊमरवैश्य ने पुत्र प्राप्ति को लेकर उन्होंने चौरा मां काली से कामना की जिसका फल यह रहा कि कुछ महीनों के बाद उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई। उन्होंने 1823 में मंदिर का निर्माण कराया। नगर के नवविवाहित दंपत्ती शादी के बाद सुख शांति व समृद्धि के लिए चौरा मां काली का आशीर्वाद लेकर अपने जीवन की शुरूआत करते हैं। चैत्र व शारदीय नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। साल भर में कई बार भजन संध्या सहित पर विशाल भंडारे का आयोजन होता है। मंदिर के पुजारी बाबा माली के पूर्वज कई दशकों से मंदिर की देखभाल और पूजा अर्चना करते चले आ रहे हैं। मंदिर के पुजारी बाबा माली ने बताया कि मंदिर पहले 7 से 8 विस्वा में स्थापित था इसके बाद यह 4 बिस्वा में सिमटकर रह गया है। पंचमी के दिन मां का विशेष श्रृंगार होता है। कस्बे के निवासी शिव प्रसाद बबलू द्वारा चैत्र व शारदीय नवरात्र में मां का विशेष सजावट का भव्य श्रृंगार तथा रोजाना प्रसाद वितरण किया जाता है।

नवरात्रि में चौरा माता मंदिर पर सुंदरकांड पाठ से गूंजा कोटिला गांव

जौनपुर धारा, सुजानगंज। ग्राम सभा देवकली के कोटिला गांव में स्थित चौरा माता मंदिर पर समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से बुधवार से नवरात्रि तक प्रतिदिन हर शाम सुंदरकांड पाठ हो रहा है। मुख्य यजमान आनंद दुबे शिक्षक के नेतृत्व में एवं समस्त ग्रामवासियों के सहयोग से नवरात्रि के पावन अवसर पर सुंदरकाण्ंड का पाठ हो रहा है। जमुना प्रसाद दुबे एवं बेनी प्रसाद दुबे ने बताया कि नवरात्रि में सुंदरकांड पाठ करने से समाज में शांति सद्भावना बनी रहती है। प्रतिदिन शाम को बड़ी संख्या में ग्रामवासी पहुंचकर पाठ के दौरान श्रीराम और मां के जयकारे लगाते हैं।