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55 साल का इंतजार, अब भी अधूरा आशियाना; पट्टे की जमीन पर कब्जे के लिए भटक रहे मुसहर परिवार

जौनपुर के खुटहन ब्लॉक स्थित बड़नपुर गांव में मुसहर परिवारों को वर्ष 1972 में पट्टे की भूमि आवंटित हुई थी, लेकिन आज तक उन्हें वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ भी जमीन विवाद के कारण अधूरा पड़ा है।
Homeअपना जौनपुरपहली बारिश नहीं झेल सकी रेलवे ट्रैक की बाउंड्रीवाल

पहली बारिश नहीं झेल सकी रेलवे ट्रैक की बाउंड्रीवाल

  • की-मैन की सूझबूझ से बड़ा रेल हादसा होने से बचा

जौनपुर धारा, शाहगंज। काशी-अयोध्या रेलमार्ग पर कोतवाली क्षेत्र अन्तर्गत उसरहटा गांव स्थित आजाद रेलवे क्रासिंग के बगल स्थित रेल लाइन के किनारे बने रिटनिंग वाल बारिश के चलते ढह गयी। हालांकि डबल लाइन होने के चलते यातायात पर कोई प्रभाव नहीं हैं लेकिन निर्माण के चंद माह में दीवार ढह जाने से रेलवे की कार्य प्रणाली व गुणवत्ता पर सवाल उठ रहा है। वहीं लगभग पचास लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। रेल पटरी दोहरीकरण के दौरान आजाद रेलवे फाटक पर पैरामाउंट स्कूल की ओर लगभग चार सौ मीटर रिटनिंग वाल का निर्माण किया गया है। प्रात: आठ बजे की मैन नारायण गुप्ता ने दीवार के पास जमीन दरकने की सूचना सीनियर सेक्शन इंजीनियर रेल पथ कैलाशनाथ यादव समेत उच्चाधिकारियों को दी। इस दौरान गेट मैन लालजी यादव को भी सूचना दी गई। इसके तुरंत बाद गंगा सतलज किसान एक्सप्रेस ट्रेन नयें पटरी से होकर गुजरी। बताते हैं कि ट्रेन के जाने के बाद दीवाल गिर गयी। की मैन की सक्रियता व सूझबूझ के चलते बड़ी दुर्घटना होने से बच गयी। रात का समय होता तो बड़ी घटना सम्भावित थी। आनन-फानन में सक्रिय हुए महकमें ने उस पटरी पर ट्रेन का आवागमन बंद कर दूसरी पटरी से कासन पर ट्रेन निकाला। वहीं लगभग डेढ़ सौ मजदूरों को विभाग ने ध्वस्त हुई दीवार की ओर मिट्टी रोकने हेतु बोरी में पत्थर का चूरा भर कटाव रोकने की कोशिश जारी है। इस दौरान इंजीनियर कैलाश नाथ यादव, पी डब्लू वाई मनीष यादव, जेई मुनीष यादव आदि मौजूद रहे।