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आर्थिक सुरक्षा और घरेलू आजीविका के बीच संतुलन की आवश्यकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीद सीमित करने की अपील ने देश में आर्थिक सुरक्षा और घरेलू आजीविका के बीच संतुलन की बहस को तेज कर दिया है। यह संपादकीय सर्राफा बाजार, विदेशी मुद्रा भंडार, गोल्ड रीसाइक्लिंग मॉडल और लाखों कारीगरों के रोजगार पर इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
Homeअपना जौनपुरदीवारों पर थूककर स्वच्छता मिशन पर धब्बा लगा रहे कलेक्ट्रेट कर्मचारी

दीवारों पर थूककर स्वच्छता मिशन पर धब्बा लगा रहे कलेक्ट्रेट कर्मचारी

जौनपुर। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने सरकारी कार्यालयों में पान गुटखा और पालिथिन पर प्रतिबंध लगा दिया है। कर्मचारियों को स्वच्छता की सीख देते हुए कार्यालयों को साफ सुथरा रखने का निर्देश दिया गया है।

कई जगह इसका असर भी दिखने लगा है, लेकिन जिले में सरकारी दफ्तरों में इसका असर नहीं दिख रहा है। सरकारी कार्यालयों की दीवारें अभी भी पान की पीक से रंगीन हैं, और वहां गन्दगी स्थानीय कर्मचारी कर रहें हैं। एक तरफ स्वच्छ भारत तहत सफाई के बड़े दावे किए जा रहे हैं व जगह-जगह स्वच्छता के संदेश देने के लिए फ्लैक्स बोर्ड लगाए जा रहे हैं, ङ्क्षकतु इन ऑफिसों के बाहर ही कूड़ा-कर्कट के ढेर लगे हुए हैं।

जौनपुर धारा टीम ने कलेक्ट्रेट परिसर के विभिन्न कार्यालयों में पहुंच कर हकीकत की पड़ताल की तो सरकारी दफ्तरों पर पान की पीक ऐसी मिली की पूरी दीवाल लाल हुई पड़ी है। कलेक्ट्रेट के रिकार्ड रूम, राजस्व अजिलेखागार कक्ष सं.१० कार्यालय के गलियारे को भी कर्मचारियों ने जगह जगह पीकदान के रूप में परिवर्तित कर रखा है। भले ही त्योहारों पर साफ सफाई में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं लेकिन स्वयं के दफ्तर की सफाई की सुधि प्रशासन को नही है।

मुख्य गेट के समीप ही पान की पीक की बदबू उठती है। सरकार के निर्देश पर समय-समय पर स्वच्छता के प्रति लोगो को जागरूक करते हुए नगर में बाइक रैली, पद यात्रा आदि के माध्यम से अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी दफ्तरों में जगह-जगह दीवारों पर थूककर लोगों ने स्वच्छता मिशन पर धब्बा लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी रखी है। बाहरी व्यक्तियों की बात छोड़िए यहां तो कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी ही सफाई अभियान को असफल करने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

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