खुटहन। बाबा जयगुरुदेव महाराज द्वारा 1970के दशक में कही गई भविष्यवाणियों से अवगत कराते हुये तथा उनसे बचने, बचाने की युक्ति बताते हुये जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा के राश्ट्रीय अध्यक्ष संत पंकज जी महाराज कल सायंकाल गंभीरन बाजार के बगल खेत मैदान पर पधारे यह यात्रा का 116वाँ पड़ाव रहा। अपने सत्संग सम्बोधन में पूज्य महाराज जी ने कहा कि आपकी धर्म पुस्तकें कहती हैं कि ”बड़े भाग्य मानुश तन पावा, सुर दुर्लभ सद्ग्रन्थन गावा। तो प्रेमी भाई-बहनों! सबसे पहले आप मानवतावादी बनो। यह मत पूछो कि महात्मा किस जाति के हैं, महात्मा यहां जाति बिरादरी बनाने नहीं आते हैं वे तो केवल परमात्मा की भक्ति करने की प्रेरणा जगाने आते हैं। कबीर साहब जुलाहे थे, नानक जी सिख थे, रैदास जी हरिजन थे, गोस्वामी जी ब्राह्मण थे, मीराबाई छत्राणी थी, पलटूदास जी बनिया थे यदि ये लोग इसी कलयुग में साधना करके परमात्मा को पा सकते हैं तो भाई, बहनों! आप भी पा सकते हो। इसके लिये आप को घर-बार नहीं छोड़ना, साधू नहीं बनना, खेती दुकान दफ्तर का काम करने के बाद, चौबीस घण्टे में घण्टा दो घण्टा समय निकाल कर प्रभु का सच्चा भजन इस मनुष्य मन्दिर में कर लें। परमात्मा जब भी मिलता है तो गृहस्थ आश्रम में ही मिलता है। घर-बार छोड़ने पर नहीं। संस्थाध्यक्ष ने शराब के अवगुण गिनाते हुये कहा कि जो शराब पीता है, वह झूठ बोलता है, धोखा देता है, मारपीट करता है, झूठे मुकदमें, झूठी गवाहिंया दे देता है, जिसका लेता है कभी नहीं देता है। इसलिये आप सब लोग इस घातक, बुद्धिनाशक पदार्थ के सेवन से बचें तथा सभी धर्म पुस्तकों ने अहिंसा परमोधर्म: कहा है।
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आर्थिक सुरक्षा और घरेलू आजीविका के बीच संतुलन की आवश्यकता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीद सीमित करने की अपील ने देश में आर्थिक सुरक्षा और घरेलू आजीविका के बीच संतुलन की बहस को तेज कर दिया है। यह संपादकीय सर्राफा बाजार, विदेशी मुद्रा भंडार, गोल्ड रीसाइक्लिंग मॉडल और लाखों कारीगरों के रोजगार पर इसके प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
हर बुराई का जड़ है शराब : पंकज महाराज



