जौनपुर धारा, जौनपुर। बुधवार को नवरात्र के चौथे दिन माँ कुष्मांडा का पूजन अर्चन किया गया। विभिन्न देवी पण्डालों में माँ की आरती कर भक्तों ने दर्शन किया। नगर के हाइडिल रोड शिव शक्ति दुर्गा पूजा समिति, गौशाला हिंदी भवन के पास महाशक्ति दुर्गा पूजा समिति तथा दीवानी कचहरी गेट माँ अम्बे कत्यायनी दुर्गा पूजा समिति द्वारा स्थापित पूजा पण्डालों में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ रही है। माँ के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। पिछले दो सालों में कोविड के कारण सभी त्योहार फीके पड़े थे लेकिन इस वर्ष लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है।

नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने अपने ईषत हास्य से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा गया है। नगर के पूजा पण्डालों में इस समय भारी भीड़ उमड़ रही है जहां शाम होते ही पण्डाल जगमगाने लगते है। मां की साधना करने पर साधक के जीवन से जुड़े सभी कष्ट दूर और कामनाएं पूरी होती हैं। इनका निवास सूर्य मंडल के भीतर के लोक में स्थित है। सूर्य लोक में निवास कर सकने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनके सात हाथों में क्रमश: कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा कहा जाता है।इस देवी का वास सूर्यमण्डल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है इसीलिए इनके शरीर की कांति और प्रभा सूर्य की भांति ही दैदीप्यमान है। इनके ही तेज से दसों दिशाएं आलोकित हैं। ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है। नवरात्रि के चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा-आराधना करनी चाहिए। इससे भक्तों के रोगों और शोकों का नाश होता है तथा उसे आयु, यश, बल और आरोग्य प्राप्त होता है।ये देवी अत्यल्प सेवा और भक्ति से ही प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं। सच्चे मन से पूजा करने वाले को सुगमता से परम पद प्राप्त होता है। मां कुष्मांडा देवी को प्रसन्न करने के लिए पूजा-पाठ से अधिक उनमें एकाग्रता से मन लगाकर समर्पित भाव से ध्यान लगाना चाहिए। कर्म और विद्या से जो ज्ञान मिलेगा वह अपने ही पास रहेगा। माता कुष्मांडा का प्रिय रंग हरा और पीला है। इसलिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। दैहिक, दैविक और भौतिक तीनों ताप से युक्त मां कुष्मांडा के उदर में सारा संसार वास करता है। जातक को इन तीनों तापों से मुक्ति के लिए मां की आराधना ही एक जरिया माना गया है।



