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खरपतवार नियंत्रण और बेहतर पैदावार की दी गयी जानकारी

जौनपुर धारा, केराकत। क्षेत्र के ग्राम अमिहित में स्थित आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र अमिहित जौनपुर-2 के वरिष्ठ पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. संदीप कन्नौजिया ने किसान गोष्ठी आयोजित कर फसल की बेहतर पैदावर के सम्बन्ध में किसानों को जानकारी दी। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहाकि इस समय खरीफ की दलहनी फसल अरहर एवं उर्द की बुवाई हो चुकी है। ऐसा पाया जाता है कि किसान धान की रोपाई करने के लिए खेत की अच्छी तरह से तैयारी करते हैं परंतु अरहर एवं उर्द की बुवाई ज्यादातर पहले से खाली खेतों में वर्षा होने के बाद जुताई करके छिटकवां विधि से बुवाई कर देते हैं। ऐसी स्थिति में दलहनी फसलों के खेतों में खरपतवार की समस्या बहुत अधिक हो जाती है जिसकी वजह से उत्पादन में ३0 से ३5 प्रतिशत या इससे अधिक नुकसान हो जाता है। पहले लोग दलहनी फसलों में निराई गुड़ाई करके पशुओं के लिए चारा इकट्ठा कर लेते थे, परंतु आज के समय में निराई गुड़ाई करना बहुत मुश्किल हो गया है जिसके चलते किसान की उपज प्रभावित होती है। जनपद में अरहर की उत्पादकता 9.5 कुंतल प्रति हेक्टेयर है जबकि इसकी उत्पादकता 14 से 16 कुंटल प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए। इसी प्रकार उर्द की उत्पादकता 6.12 कुंतल प्रति हेक्टेयर है जबकि उर्द की उत्पादकता जौनपुर में 9 से 10 कुंटल प्रति हेक्टेयर होनी चाहिए। वहीं खरीफ की इन दोनों दलहनी फसल अरहर एवं उर्द में सभी प्रकार के खरपतवार की रोकथाम के लिए इमिजाथा पर 10 एसएल एक ऐसा खरपतवारनाशी है जो बहुत कारगर सिद्ध हुआ है। एक एकड़ क्षेत्रफल हेतु इस खरपतवारनाशी की 400 मिली मात्रा को 100 से 125 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करते हैं। सारे अपशिष्ट नष्ट हो जाते हैं। वहीं इस दवा के साथ अमोनियम सल्फेट नामक पोषक तत्व मिलाकर छिड़काव करने से खरपतवार नष्ट होने के साथ-साथ अमोनियम सल्फेट के प्रभाव से अरहर एवं उर्द की बढ़वार बहुत अच्छी हो जाती है और उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। खरपतवारनाशी का छिड़काव बुवाई के 20 से 25 दिन के अंदर कारगर होता है। अगर वर्षा हो रही हो तो उस समय किसानों को दवा का छिड़काव करना चाहिये।

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