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जौनपुर में जन्माष्टमी का उत्सव, मंदिरों से पुलिस लाइन और जिला जेल तक विशेष आयोजन

जौनपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर जिलेभर में उत्साह रहा। मंदिरों, पुलिस लाइन और जिला जेल में विशेष आयोजन हुए, जबकि बाजारों में लड्डू गोपाल की पोशाक और श्रृंगार सामग्री की मांग बढ़ी।
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Tulasi Vivah 2024 : तुलसी विवाह व देवउठनी एकादशी को लेकर सजे बाजार

  • कंदा, सिंघडा, कपड़े, ज्वेलरी व सौंदर्य प्रसाधन सामग्री की हो रही खरीदारी

जौनपुर धारा, जौनपुर। देवउठनी एकादशी का पर्व मंगलवार को मनाया जाएगा, जिसे लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। बाजारों में गन्ना, कंदा व सिंघाड़ा की खूब बिक्री हो रही है। इस दिन से मांगलिक कार्यक्रम भी शुरू हो जाएंगे। इसके लिए बाजारों में खरीदारी करने के लिए ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगी है।

हिन्दू धर्म के मान्यता अनुसार योग निद्रा में जाने वाले भगवान विष्णु चार माह बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं, इस दिन पूजा-अर्चना कर देवों को जगाने की परंपरा का निर्वहन किया जाता है। देवों के जागने पर ही वैवाहिक व शुभ कार्य भी प्रारंभ हो जाता हैं। इसे लेकर सोमवार को सुबह से ही बाजारों में जगह-जगह कपड़े, ज्वेलरी, सौंदर्य प्रसाधन सामग्री की जमकर खरीदारी की गई। विक्रेताओं ने इसके लिए कोतवाली चौराह, सब्जी मण्डी, ओलन्दगंज, लाइन बाजार आदि क्षेत्र के बाजारों में सामान दुकानों पर सज गये है।

बताते चले कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे प्रबोधिनी एकादशी व देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह एकादशी सभी एकादशियों में सबसे पवित्र एकादशी मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु का खास पूजा करने का विधान होता है। इसी दिन से मांगलिक कार्यक्रम प्रारंभ हो जाते हैं।

तुलसी विवाह से शुरू होता है मांगलिक कार्यक्रम

देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है। इस दिन तुलसी की शालिग्राम से शादी की जाती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु के नौवें अवतार भगवान कृष्ण ने एकादशी को देवी वृंदा तुलसी से विवाह किया था। इसलिए देव उठनी एकादशी को तुलसी विवाह किया जाता हैं। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 11 नवंबर को संध्याकाल 6 बजकर 47 मिनट पर आरंभ होगी। 12 नवंबर को संध्याकाल 4 बजकर 3 मिनट पर खत्म होगी। इसलिए उदयातिथि को आधार मानते हुए 12 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी।