तारपट्टी बेलवार में 1972 से चली आ रही रामलीला की परंपरा में दिखी आस्था, त्याग और मर्यादा की झलक
सुजानगंज, जौनपुर। तारपट्टी बेलवार गांव में आयोजित श्री स्वामी कृष्णानंद आदर्श रामलीला कमेटी की रामलीला में श्रीराम के वन गमन प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। राजमहल छोड़कर वन की ओर प्रस्थान करते श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के दृश्यों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कलाकारों के सजीव अभिनय और मार्मिक संवादों से रामलीला स्थल का माहौल गमगीन हो गया। कई दर्शकों की आंखें नम हो गईं।
मंचन में राजा दशरथ द्वारा श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी से लेकर मंथरा के प्रभाव में आकर कैकेयी द्वारा दो वरदान मांगने तक की घटनाओं को दर्शाया गया। कैकेयी ने भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। इसके बाद अयोध्या का माहौल बदल गया।
पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए श्रीराम ने बिना विरोध किए राजपाट त्यागकर वन जाने का निर्णय लिया। माता सीता और अनुज लक्ष्मण ने भी उनके साथ वन जाने का संकल्प लिया। वहीं, पुत्र वियोग में राजा दशरथ की व्याकुलता और श्रीराम से बिछड़ने के दुख में अयोध्यावासियों के विलाप का दृश्य दर्शकों के हृदय को छू गया। कलाकारों ने अपने अभिनय से पूरे प्रसंग को जीवंत बना दिया। इस दौरान जय श्रीराम के उद्घोष से रामलीला स्थल गूंजता रहा।
1972 से निभाई जा रही रामलीला की परंपरा
तारपट्टी बेलवार गांव में वर्ष 1972 से रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। श्री स्वामी कृष्णानंद आदर्श रामलीला कमेटी के तत्वावधान में चली आ रही यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रामलीला के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से लोगों को सत्य, त्याग, कर्तव्यपालन, भाईचारे और माता-पिता के प्रति सम्मान का संदेश दिया जाता है। आयोजन की सीख है कि कठिन परिस्थितियों में भी मर्यादा और धर्म के मार्ग पर अडिग रहना चाहिए। रामलीला के सफल मंचन में कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों का सहयोग रहा।


