जौनपुर। उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित नए रोजगार कानून का विरोध जताया। इस संबंध में यूनियन पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा।
यूनियन नेताओं का कहना है कि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों के करोड़ों मजदूरों को रोजगार की गारंटी देने वाली महत्वपूर्ण योजना रही है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित नए कानून में वित्तीय हिस्सेदारी का स्वरूप बदल दिया गया है, जिससे राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि जहां मनरेगा में अधिकांश व्यय केंद्र सरकार वहन करती थी, वहीं नए प्रावधानों में राज्यों की भागीदारी बढ़ाए जाने से योजना के प्रभावी संचालन पर प्रश्नचिह्न खड़े हो सकते हैं। यूनियन ने आशंका जताई कि इससे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि कार्य वर्षभर उपलब्ध नहीं रहता, जबकि प्रस्तावित कानून में कृषि क्षेत्र पर अधिक जोर दिया गया है। ऐसे में मजदूरों को नियमित रोजगार मिलने में कठिनाई हो सकती है।
खेत मजदूर यूनियन ने आशंका जताई कि यदि पर्याप्त बजट की व्यवस्था नहीं हुई तो ग्रामीण गरीबों और खेत मजदूरों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। यूनियन नेताओं ने केंद्र सरकार से मजदूर हितों को ध्यान में रखते हुए रोजगार गारंटी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने की मांग की। इस दौरान संगठन के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।


