जौनपुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व आयोजित विशेष योग सत्र में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय का इनडोर स्टेडियम शनिवार को अनुशासन, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने स्वयं योग प्रशिक्षक की भूमिका निभाते हुए राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के लगभग 600 छात्र-छात्राओं को योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति ने विभिन्न योगासनों, प्राणायाम और ध्यान की विधियों का प्रशिक्षण देते हुए योग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का साधन नहीं है, बल्कि मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और व्यक्तित्व विकास का मजबूत आधार भी है।
योग से तन, मन और आत्मा का होता है विकास
प्रो. वंदना सिंह ने कहा कि योग व्यक्ति के तन, मन और आत्मा को जोड़कर जीवन को संतुलित, स्वस्थ और उद्देश्यपूर्ण बनाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान की व्यस्त और तनावपूर्ण जीवनशैली में योग तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने और कार्यक्षमता में सुधार लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। कई ऐसे सरल योगाभ्यास हैं जिन्हें अध्ययन और कार्यालय कार्य के दौरान भी आसानी से किया जा सकता है।
भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है योग
कुलपति ने भारतीय ऋषि-मुनियों और महापुरुषों के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि योग के माध्यम से उन्होंने न केवल दीर्घायु प्राप्त की, बल्कि अद्भुत ऊर्जा, एकाग्रता और कार्यक्षमता का भी परिचय दिया। उन्होंने कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है और युवा पीढ़ी इसे अपनाकर स्वस्थ एवं सशक्त राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कैडेटों ने लिया नियमित योग का संकल्प
योगाभ्यास के दौरान एनसीसी कैडेटों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सत्र के समापन पर विद्यार्थियों ने योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में अनुशासन, एकाग्रता और सकारात्मकता का वातावरण बना रहा, जिसने प्रतिभागियों को योग के प्रति और अधिक प्रेरित किया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व आयोजित यह विशेष कार्यक्रम विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।


