मीका सिंह ने अपने खिलाफ 2006 में राखी सावंत द्वारा दायर कराई गई एक एफआईआर को रद्द करने की अपील करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है. सिंगर का कहना है कि उनकी राखी से सुलह हो गई है. बॉलीवुड सिंगर मीका सिंह और राखी सावंत का 2006 का जबरन किस मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. दरअसल मीका ने इस मामले को कथित तौर पर बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने 17 साल पहले राखी सावंत द्वारा जबरन किस करने को लेकर उनके खिलाफ दायर की गई एफआईआर को रद्द करने की अपील की है. ईटाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बॉलीवुड सिंगर ने दावा किया है कि राखी और उन्होंने मिल-जुलकर अपने मतभेदों को सुलझा लिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्ट्रेस फिलहाल अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट्स में बिजी है और उन्हें मीका के खिलाफ दायर की गई एफआईआर को रद्द किए जाने पर कोई ऑब्जेक्शन नहीं है.ईटाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस एएस गडकरी और पीडी नाइक की बेंच को सावंत के वकील आयुष पासबोला ने बताया कि दोनो के बीच सुलह हो गई है और राखी को एफआईआर रद्द करने में कोई दिक्कत नहीं है. हालांकि वकील ने बेंच को ये भी इंफॉर्म किया कि राखी सावंत का केस रद्द करने की सहमति वाला हलफनामा हाईकोर्ट की रजिस्ट्री से गुम हो गया था और इस प्रकार अनट्रेसेबल था. इसके बाद पीठ ने कथित तौर पर सावंत को एक नया हलफनामा दायर करने के लिए एक हफ्ते का टाइम दिया है.बता दे कि मामला 11 जून 2006 में मीका सिंह के जन्मदिन की पार्टी का है. इस दौरान मीका सिंह ने राखी सावंत को बिना उनकी मर्जी के सभी के सामने जबरन किस कर लिया था. घटना की वीडियो और तस्वीरें खूब सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. बाद में राखी ने मीका के खिलाफ छेड़छाड़ का केस दर्ज कराया था. राखी द्वारा दायर की गई शिकायत के आधार पर मीका पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (छेड़छाड़) और 323 (हमला) के तहत मामला दर्ज किया गया था. मामले में अग्रिम जमानत के लिए मीका एक सेशन कोर्ट में गुहार लगाई थी जिसे 17 जून 2006 को मंजूर कर लिया गया.
― Advertisement ―
जौनपुर में जन्माष्टमी का उत्सव, मंदिरों से पुलिस लाइन और जिला जेल तक विशेष आयोजन
जौनपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर जिलेभर में उत्साह रहा। मंदिरों, पुलिस लाइन और जिला जेल में विशेष आयोजन हुए, जबकि बाजारों में लड्डू गोपाल की पोशाक और श्रृंगार सामग्री की मांग बढ़ी।
Mika Singh ने जबरन ‘किस’ मामले को रद्द करने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का किया रुख


