Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img

छुट्टा गोवंश बने जानलेवा, एक साल में चार लोगों की मौत

खुटहन क्षेत्र में छुट्टा गोवंश किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन रहा है। ग्रामीणों के अनुसार एक साल में चार लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं।
Homeअपना जौनपुरछुट्टा गोवंश बने जानलेवा, एक साल में चार लोगों की मौत

छुट्टा गोवंश बने जानलेवा, एक साल में चार लोगों की मौत

फसलों को भी पहुंचा रहे भारी नुकसान, मक्का की खेती से दूरी बना रहे किसान

खुटहन। विकास खंड के दर्जनों गांवों में छुट्टा और निराश्रित गोवंशीय पशु किसानों की फसलों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन पशुओं के हमले और उनसे होने वाले सड़क हादसों में एक वर्ष के भीतर चार लोगों की मौत हो चुकी है। कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं, जिनका उपचार जिला अस्पताल के अलावा बीएचयू और पीजीआई तक कराया गया।

गुलालपुर गांव के मल्हनी मार्ग पर छुट्टा पशु से टकराने के बाद बाइक सवार 45 वर्षीय सत्य प्रकाश विश्वकर्मा की मौत हो गई थी। ग्रामीणों के अनुसार हादसे से एक दिन पहले ही उनके वृद्ध पिता रामकुबेर विश्वकर्मा का हृदयाघात से निधन हुआ था। पिता की मौत के दूसरे दिन पुत्र की सड़क हादसे में मौत से परिवार में मातम छा गया था।

ओईना गांव निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक हरि प्रसाद पांडेय (70) भी छुट्टा पशु के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे। बाद में पीजीआई लखनऊ में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। मैदासपट्टी गांव निवासी दयाराम यादव की भी सांड के हमले में जान जाने की बात ग्रामीणों ने बताई। ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में कई अन्य लोग भी छुट्टा गोवंशीय पशुओं के हमले में घायल हो चुके हैं।

फसलों की रखवाली बनी चुनौती

किसानों का कहना है कि छुट्टा पशु खेतों में खड़ी धान की फसल को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। रात-दिन निगरानी के बावजूद खेतों को पशुओं से बचाना मुश्किल हो रहा है।

किसानों के मुताबिक गोवंशीय पशुओं की बढ़ती समस्या के कारण क्षेत्र में मक्का की खेती भी काफी कम हो गई है। किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए लगातार खेतों की रखवाली करनी पड़ती है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से गोवंशीय पशुओं को पशुशालाओं में रखने और उनके भरण-पोषण के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मवेशियों के खुले में घूमने से किसानों की फसल के साथ राहगीरों की सुरक्षा पर भी खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों से छुट्टा गोवंशीय पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान कराने और उन्हें सुरक्षित रूप से पशुशालाओं में पहुंचाने की मांग की है।