Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img

मोहम्मद एजाजुद्दीन ने हासिल की पीएचडी की उपाधि

पूर्वांचल विश्वविद्यालय से पूरी की पीएचडी, खगोल विज्ञान पर वैज्ञानिक शोध कर आम लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं जानकारीजौनपुर। सदर विधानसभा क्षेत्र निवासी स्वर्गीय...
Homeअपना जौनपुरखेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को किया गया जागरूक, मृदा परीक्षण...

खेत बचाओ अभियान के तहत किसानों को किया गया जागरूक, मृदा परीक्षण आधारित खेती पर दिया गया जोर

जौनपुर। कृषि विभाग द्वारा शनिवार को ‘खेत बचाओ अभियान’ एवं विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत जनपद के नसीरूद्दीनपुर, मीरपुर, अब्बोपुर, बड़ागांव विशुनपुर लेबरुआ और अमरौना गांवों में किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैव-उर्वरकों के उपयोग तथा सतत कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना था।

उप परियोजना निदेशक (आत्मा) डॉ. रमेश चंद्र यादव ने कहा कि मिट्टी केवल खेती का माध्यम नहीं बल्कि एक जीवित तंत्र है, जिसकी उर्वरा शक्ति बनाए रखना भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने किसानों से फसल विविधीकरण, संतुलित उर्वरक उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने का आह्वान किया।

मृदा परीक्षण आधारित खेती से बढ़ेगा उत्पादन

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बक्शा के वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा परीक्षण आधारित पोषण प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसल उत्पादन बढ़ता है और अनावश्यक खर्च कम होता है।

विशेषज्ञों ने किसानों को लाभकारी सूक्ष्मजीवों की भूमिका, जैव-उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य सुधार की आधुनिक तकनीकों से भी अवगत कराया।

जैव-उर्वरकों से घटेगी खेती की लागत

वैज्ञानिकों ने बताया कि जैव-उत्पादों और जैव-उर्वरकों के प्रयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इससे खेती की लागत घटती है, पर्यावरण सुरक्षित रहता है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है।

कार्यक्रम के दौरान किसानों को जैव-उर्वरक एवं जैव-नियंत्रक उत्पाद बायोडर्मा (ट्राइकोडर्मा) वितरित किए गए। साथ ही खेती से संबंधित तकनीकी साहित्य भी उपलब्ध कराया गया।

किसानों ने विशेषज्ञों से पूछा समाधान

संवाद सत्र में किसानों ने मृदा उर्वरता, फसल पोषण और जैव-उर्वरकों के उपयोग से जुड़ी समस्याओं पर विशेषज्ञों से चर्चा की और समाधान प्राप्त किया। वैज्ञानिकों ने मृदा नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि, हरी खाद के लाभ और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम में ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक खादों तथा जैव-उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।