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जौनपुर की संस्कृत विद्वत परंपरा पर शास्त्रीय सम्मेलन, राष्ट्र निर्माण में योगदान पर चर्चा

जगद्गुरुओं और संस्कृत विद्वानों की तपोभूमि है जौनपुर : डॉ. अश्वनी कुमार गुप्त

सुजानगंज। श्री गौरी शंकर संस्कृत महाविद्यालय सुजानगंज एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में जौनपुर की संस्कृत विद्वत परंपरा और राष्ट्र निर्माण में संस्कृतज्ञों के योगदान पर एक दिवसीय शास्त्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन का विषय ‘राष्ट्र निर्माण में संस्कृतज्ञों का अवदान’ रहा। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जौनपुर की संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा में भूमिका को रेखांकित करते हुए संस्कृत विद्वानों के योगदान को राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

जौनपुर की धरती विद्वानों की तपोभूमि : डॉ. अश्वनी कुमार गुप्त

मुख्य अतिथि रघुवीर स्वायत्तशासी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अश्वनी कुमार गुप्त ने कहा कि जौनपुर की पावन धरती प्राचीन काल से ही महान जगद्गुरुओं, आचार्यों और संस्कृत मनीषियों की तपोभूमि रही है। देश के भाषायी और सांस्कृतिक निर्माण में यहां के संस्कृत विद्वानों का योगदान अविस्मरणीय है।

उन्होंने ‘आधुनिक पाणिनि’ के नाम से विख्यात श्री राम प्रसाद त्रिपाठी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने व्याकरण शिक्षण के माध्यम से अनेक विद्वानों को तैयार किया और देश की भाषायी चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारतीय संस्कृति के संवर्धन में विद्वानों की भूमिका

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व प्राचार्य डॉ. जय प्रकाश तिवारी ने पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य के संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति के संवर्धन में योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्वानों के प्रयासों से भारतीय संस्कृति और संस्कृत को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठा मिली है।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय कुमार त्रिपाठी ने जौनपुर की संस्कृत विद्वत परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस धरती ने जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु रामभद्राचार्य, प्रो. अभिराज राजेन्द्र मिश्र, प्रो. आद्या प्रसाद मिश्र, प्रो. राम सेवक दुबे और पं. देवतादीन चतुर्वेदी सहित अनेक विद्वान दिए हैं, जिन्होंने संस्कृत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।

शोध सत्र में प्रस्तुत किए गए शोध-पत्र

सम्मेलन को वरिष्ठ पत्रकार श्याम शंकर पाण्डेय, आचार्य विनोद कुमार त्रिपाठी, पं. शिवानन्द चौबे और जितेन्द्र कुमार सिंह ने भी संबोधित किया। शोध सत्र में आयुषी सिंह, उमेश चंद्र तिवारी, संदीप कुमार तिवारी और इन्द्रदेव द्विवेदी ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम का संचालन आचार्य खगेन्द्र कुमार मिश्र ने किया। आचार्य अखिलेश मणि त्रिपाठी ने अतिथियों, विद्वानों और उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी और संस्कृत अनुरागी उपस्थित रहे।