आदेश के बावजूद सड़क पर खड़ी होती हैं सरकारी और निजी बसें, यातायात सुचारु कराने में पुलिस को करनी पड़ती है मशक्कत
जौनपुर। शहर में यातायात व्यवस्था सुधारने और आए दिन लगने वाले जाम से निजात दिलाने के प्रयासों के बीच रोडवेज और निजी बसों के सड़क पर खड़े होने का मामला फिर सामने आया है। आरोप है कि निर्धारित रोडवेज परिसर में बसें खड़ी करने और वहीं से सवारियां बैठाने के निर्देश के बावजूद कुछ रोडवेज बस चालक-परिचालक जेसीज चौराहे के आसपास सड़क पर बसें खड़ी कर सवारियां भरते हैं। इससे व्यस्त मार्ग पर यातायात प्रभावित होने और जाम की स्थिति बनने की शिकायत है।
रोडवेज से जेसीज चौराहे तक का मार्ग दिनभर वाहनों की आवाजाही से व्यस्त रहता है। ऐसे में सड़क किनारे बसों के रुकने और सवारियां बैठाने से वाहनों की रफ्तार प्रभावित होती है। स्थानीय लोगों के अनुसार बस के पीछे अन्य वाहन रुकते चले जाते हैं और कुछ ही देर में सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इससे राहगीरों के साथ स्कूली वाहनों, एंबुलेंस और अन्य जरूरी सेवाओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सड़क पर बस खड़ी कर सवारी भरने की शिकायत
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ चालक-परिचालक बसों को सड़क पर आड़े-तिरछे तरीके से खड़ा कर सवारियां बैठाने लगते हैं। बस के रुकने के दौरान सड़क का एक हिस्सा घिर जाने से बाकी वाहनों के लिए रास्ता संकरा हो जाता है। यातायात का दबाव बढ़ने पर पुलिसकर्मियों को वाहनों का आवागमन सुचारु कराने के लिए मौके पर मशक्कत करनी पड़ती है।
लोगों का कहना है कि निजी बसों के संचालन को लेकर भी अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई देती। कई निजी बसें भी सुबह से ही रोडवेज परिसर और जेसीज चौराहे के बीच अलग-अलग स्थानों पर खड़ी होकर सवारियां बैठाती और उतारती हैं। इससे पूरे दिन यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की शिकायत है।
आदेश के बाद भी सड़क पर बसें
यातायात पुलिस के सिपाही कृष्ण कुमार सिंह के अनुसार रोडवेज बसों के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनती है। उन्होंने बताया कि समस्या को देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट, परिवहन विभाग और यातायात विभाग की ओर से रोडवेज बसों को रोडवेज परिसर में खड़ा करने और वहीं से सवारी भरने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बावजूद सड़क पर बसें खड़ी होने की शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में निर्देशों के प्रभावी अनुपालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सरकारी बसों के साथ निजी बसों पर भी सवाल

यातायात समस्या केवल सरकारी बसों तक सीमित नहीं बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार निजी बसें भी सड़क के अलग-अलग हिस्सों में खड़ी होकर सवारी बैठाती हैं। सुबह से शाम तक बसों के ठहराव और सवारी चढ़ाने-उतारने की प्रक्रिया के कारण यातायात का दबाव बढ़ता रहता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सरकारी और निजी बसों के लिए निर्धारित स्थान पर ही सवारी बैठाने और उतारने की व्यवस्था सख्ती से लागू हो तो व्यस्त मार्ग पर यातायात दबाव कम किया जा सकता है। इसके लिए निजी बसों के लिए भी स्पष्ट स्थान और नियम तय करने की मांग उठ रही है।
जाम का असर राहगीरों से लेकर जरूरी सेवाओं तक
बसों के ठहराव से बनने वाला जाम केवल कुछ मिनट की परेशानी तक सीमित नहीं रहता। एक स्थान पर बस रुकने के बाद उसके पीछे वाहनों की कतार बढ़ती जाती है। पहले से मौजूद यातायात के बीच बस खड़ी होने से सड़क पर उपलब्ध जगह और कम हो जाती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक इसका असर रोजाना आवागमन करने वाले लोगों के साथ स्कूली वाहनों और जरूरी सेवाओं से जुड़े वाहनों पर भी पड़ता है। नागरिकों का कहना है कि निर्धारित बस परिसर का उपयोग सुनिश्चित कराने से इस मार्ग पर अनावश्यक यातायात दबाव को कम किया जा सकता है।
नियमों के पालन पर जोर देने की जरूरत
शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर अब सवाल नियम बनाने से अधिक उनके पालन को लेकर उठ रहा है। रोडवेज प्रशासन, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के स्तर से निर्धारित स्थान पर बसों का संचालन और सड़क पर अनावश्यक ठहराव रोकना जरूरी बताया जा रहा है।
फिलहाल जेसीज चौराहे और आसपास के मार्ग पर बसों के ठहराव से जाम की समस्या की शिकायत बनी हुई है। ऐसे में सरकारी और निजी दोनों बस संचालकों के लिए निर्धारित स्थान और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की जा रही है, ताकि व्यस्त मार्ग पर यातायात व्यवस्था को सुचारु किया जा सके।


