रामकथा के पांचवें दिन आचार्य शांतनु महाराज ने सुनाया वनगमन का प्रसंग, त्याग और कर्तव्यपालन का दिया संदेश
जौनपुर। बीआरपी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के पांचवें दिन भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। आचार्य शांतनु महाराज ने श्रीराम के अयोध्या आगमन से लेकर राज्याभिषेक की तैयारियों और वनगमन तक की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, सत्य और कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में आयोजित रामकथा में आचार्य ने बताया कि माता सीता और श्रीराम के विवाह के बाद अयोध्या में उत्सव का माहौल था। महाराज दशरथ सहित पूरा राजपरिवार नववधुओं के स्वागत के लिए उत्साहित था। श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां चल रही थीं और अयोध्यावासी इस घोषणा से प्रसन्न थे।
राज्याभिषेक की खुशियां बदलीं शोक में
आचार्य शांतनु महाराज ने कथा में बताया कि दासी मंथरा के बहकावे में आकर महारानी कैकेयी ने महाराज दशरथ से अपने दो वरदान मांग लिए। उन्होंने भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। इससे अयोध्या में छाई खुशियां शोक में बदल गईं।
महाराज दशरथ अपने प्रिय पुत्र को वन जाने से रोकना चाहते थे, लेकिन दिए गए वचन के कारण विवश थे। पिता की मर्यादा बनाए रखने के लिए भगवान श्रीराम ने वनवास स्वीकार कर लिया। माता सीता ने भी पति के साथ वन जाने का संकल्प लिया, जबकि लक्ष्मण बड़े भाई की सेवा के लिए उनके साथ चल पड़े।
त्याग और मर्यादा की सीख
श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के वनगमन तथा पुत्र-वियोग में महाराज दशरथ की मृत्यु का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। आचार्य ने कहा कि श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाकर परिवार और समाज में प्रेम, सद्भाव और मर्यादा कायम रखी जा सकती है।
रामकथा में टीडी कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष राजेश सिंह, भाजपा नेता गिरीश यादव, आईएएस शिव प्रकाश सिंह, आरएसएस प्रचारक राजकुमार सिंह, महंत नरसिंह दास, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष मनोज सिंह, भाजपा काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय मंत्री अजीत सिंह, डॉ. रामसूरत मौर्य, अमित सिंह, सुमित सिंह, दीपक सिंह, शिव सिंह और भुवनेश्वर सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।


