Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img

Jaunpur Dhara 18-08-2026

Jaunpur Dhara E-Paper का आज का अंक यहां पढ़ें। जौनपुर धारा समाचार पत्र में जौनपुर और आसपास की स्थानीय खबरों, उत्तर प्रदेश समाचार और प्रमुख घटनाओं की ताजा जानकारी प्राप्त करें।
Homeअपना जौनपुरJaunpur News : गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से होगा कृषि का सतत विकास

Jaunpur News : गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से होगा कृषि का सतत विकास

जौनपुर धारा, खुटहन। कृषि विभाग द्वारा शुक्रवार को ब्लाक सभागार में कृषि सूचना तन्त्र के सुदृढ़ीकरण एवं कृषक जागरूकता कार्यक्रम/आत्मा योजना अंतर्गत खरीफ उत्पादकता गोष्ठी/कृषि निवेश मेला का आयोजन किया गया कृषि विशेषज्ञों द्वारा किसानों को गौ आधारित शून्य बजट की प्राकृतिक खेती, फरीफ फसलों की उन्नति तकनीक, किसान कार्ड, फसल बीमा, पौधरोपण आदि की जानकारी दी गई। मुख्य अतिथि ब्लाक प्रमुख बृजेश यादव ने कहा कि सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है उसका लाभ किसान लेकर किसान समृद्धि कर सकते हैं।उप परियोजना निदेशक आत्मा डॉ.रमेशचन्द्र यादव ने किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि पूरी तरह से प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल से की जाने वाली खेती को जैविक खेती कहा जाता है। जैविक खेती केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, वरन पशुपालन में भी यदि पशुओं को भोजन और दवाइयां इत्यादि प्राकृतिक रूप से उपलब्ध संसाधनों से प्रदान की जाएं तो ऐसे पशुओं के उत्पाद भी जैविक पशु उत्पाद कहलाते हैं। जब जैविक कृषि उत्पादन की बात करते हैं तो इसका अर्थ यह होता है कि कृषि उत्पादन के लिए जिन संसाधनों यथा (खाद,कीटनाशक इत्यादि) का उपयोग हो वे सभी प्राकृतिक रूप से ही बने होनी चाहिए इसके लिए गर्मी में गहरी जुताई, बीज शोधन, खरपतवार नियंत्रण, मल्चिंग, पौधों को पोषण गोबर की खाद, हरी खाद, वर्मी कंपोस्ट, पीएसबी कल्चर, माइकोराइजा, राइजोबियम, फसल चक्र का पालन, कीट एवं रोग नियंत्रण हेतु जैविक रोगनाशक/कीटनाशक ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया बेसियाना का प्रयोग करें। पांच किलो ताजा गाय का गोबर लेकर एक कपड़े की थैली में रखकर एक पात्र में रख दें और पात्र को पानी से भर दे इससे गोबर में विद्यमान सारे तत्व छनकर पानी में आ जाएंगे। दूसरे पात्र में 50ग्राम चूना लेकर एक लीटर पानी में मिलाएं। 12 से 16 घण्टे बाद कपड़े की थैली को दबाकर निचोड़ लें और गोबर अंक के साथ पांच लीटर गोमूत्र मिला दे, 50ग्राम जंगल की शुद्ध मिट्टी, चूने का पानी और 20लीटर सादा पानी भी मिला दे। 8 से 12घण्टों तक इस मिश्रण को छोड़ दीजिए इसके पश्चात पूरा मिश्रण छान लें। छना हुआ मिश्रण बीज उपचार के लिए उपयोग करें। दश किग्रा गाय का गोबर +10 लीटर गोमूत्र +2 किग्रा.गुण तथा एक किग्रा किसी दाल का आटा+ एक किग्रा जीवंत मृदा को 200लीटर जल में मिलाकर पांच से सात दिनों हेतु सड़ने दें। नियमित रूप से दिन में तीन बार मिश्रण को हिलाते रहे। एक एकड़ क्षेत्र में सिंचाई जल के साथ प्रयोग करें। अध्यक्षता भाजपा मण्डल अध्यक्ष बंश बहादुर पाल तथा संचालन एडीओ एजी.विकास सिंह ने किया।इस मौके पर अपर जिला कृषि अधिकारी रविन्द्र कुमार, अवर अभियंता पीयूष कांत मौर्य, प्राविधिक सहायक शेषनाथ बिन्द, बीटीएम राजेन्द्र पाल, एफपीओ की सीईओ ममता सिंह यादव, सुभाष उपाध्याय, हीरालाल, रामधनी, अखिलेश पाठक, शशांक तिवारी आदि किसान मौजूद रहे।