जौनपुर। एक ओर सरकार ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत शहरों को साफ-सुथरा बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जौनपुर में कचरा निस्तारण की जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में खुलेआम कूड़ा डंप किया जा रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों का जीना मुश्किल हो गया है।
रिहायशी इलाकों में कूड़े के ढेर
शहर के कई प्रमुख और व्यस्त इलाकों में अवैध डंपिंग यार्ड बन गए हैं। हनुमान घाट जैसे धार्मिक स्थल के पास कचरे के ढेर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। तूतीपुर नाले के पास गंदगी से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
सिपाह क्षेत्र में सत्यम होटल के पास और जेसीज चौराहे के आसपास भी कूड़े के बड़े ढेर देखे जा सकते हैं, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों को बदबू और मच्छरों का सामना करना पड़ रहा है।
कुल्हनमऊ वेस्ट प्लांट बना ‘सफेद हाथी’
जौनपुर के कुल्हनमऊ में लगभग 12.39 करोड़ रुपये की लागत से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किया गया है। नियम के अनुसार शहर के 39 वार्डों का कचरा यहां प्रोसेस होना चाहिए, लेकिन यह प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है।
परिणामस्वरूप कूड़ा ढोने वाली गाड़ियां शहर से बाहर जाने के बजाय खाली जगहों पर ही कचरा गिरा रही हैं।
स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
रिहायशी इलाकों में कूड़ा डंप होने से वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। बारिश के मौसम में यही कचरा भूजल को भी प्रदूषित कर सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
यदि समय रहते हनुमान घाट, तूतीपुर, सिपाह और जेसीज चौराहे जैसे क्षेत्रों से कूड़ा डंपिंग बंद कर कुल्हनमऊ प्लांट को पूरी तरह सक्रिय नहीं किया गया, तो भविष्य में शहर में बड़ी महामारी फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।



