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जौनपुर में गैस किल्लत बरकरार: भारत गैस एजेंसी पर सिलेंडर के लिए लंबी कतारें, उपभोक्ता परेशान

जौनपुर गैस किल्लत : डिजिटल इंडिया और उज्ज्वला योजना के विस्तार की बड़ी-बड़ी बातों के बीच जौनपुर की सच्चाई एक अलग ही तस्वीर पेश करती है। यहाँ गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लगने वाली लंबी कतारें किसी प्रगति की नहीं, बल्कि एक जमीनी विफलता की कहानी कहती हैं। मई 2026 की भीषण गर्मी में खाली सिलेंडर लेकर खड़े लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर बुकिंग और भुगतान ऑनलाइन होने के बावजूद उन्हें गैस के लिए धूप में कतार क्यों लगानी पड़ रही है?

शहर के सदर, मड़ियाहूं, शाहगंज और केराकत क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि बुकिंग के 10 से 15 दिन बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुँचता। होम डिलीवरी की व्यवस्था, जो सुविधा के लिए बनाई गई थी, अब खुद असुविधा का प्रतीक बनती जा रही है।

आरोप यह भी हैं कि व्यवस्था के भीतर एक अनौपचारिक नेटवर्क काम कर रहा है, जहाँ अतिरिक्त पैसे देने पर सिलेंडर समय से पहले उपलब्ध हो जाता है, जबकि सामान्य उपभोक्ता इंतजार करता रह जाता है। यह स्थिति केवल आपूर्ति की कमी नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल है।

समस्या सिर्फ घरेलू गैस तक सीमित नहीं है। छोटे और मध्यम व्यवसाय भी इसकी चपेट में हैं। 5 किलो और 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में वृद्धि ने रेस्टोरेंट और ढाबा कारोबार को प्रभावित किया है। जौनपुर, जो अपने खान-पान और स्थानीय स्वाद के लिए जाना जाता है, वहाँ अब बढ़ती लागत के कारण उपभोक्ताओं पर भी बोझ बढ़ रहा है।

स्थानीय स्तर पर कालाबाजारी और वितरण में अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसियों में स्टॉक और वास्तविक वितरण के बीच अंतर बना रहता है, जबकि निगरानी तंत्र अक्सर औपचारिकता तक सीमित रह जाता है।

ऐसे में समाधान केवल प्रशासनिक निर्देश नहीं हो सकता। जरूरत इस बात की है कि गैस एजेंसियों के स्टॉक और वितरण की नियमित निगरानी हो, होम डिलीवरी प्रणाली को वास्तविक रूप से लागू किया जाए और शिकायत निवारण व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए।

जौनपुर की जनता सुविधा के नाम पर कतारों में खड़े रहने के लिए मजबूर नहीं होनी चाहिए। बुनियादी जरूरतों की यह जद्दोजहद केवल असुविधा नहीं, बल्कि व्यवस्था पर एक गंभीर प्रश्न है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह असंतोष केवल एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक सामाजिक असंतोष का रूप ले सकता है।