जौनपुर। जिले में प्रतिबंधित तंबाकू उत्पाद ‘दोहरा’ के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद इसका अवैध कारोबार पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है। हाल के दिनों में हुई बड़ी छापेमार कार्रवाइयों के बाद बाजार में इसकी उपलब्धता कुछ कम जरूर हुई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार गुपचुप तरीके से इसकी बिक्री अब भी जारी है।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जिला स्तर पर निगरानी और कार्रवाई लगातार जारी है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों से दोहरा की आपूर्ति और बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी और अधिक प्रभावी बनाई जाए तो इस अवैध कारोबार पर बेहतर अंकुश लगाया जा सकता है।
कार्रवाई के बाद बढ़े बाजार भाव
प्रतिबंधित उत्पाद होने के बावजूद इसकी मांग बनी हुई है। हालिया छापेमारी के बाद बाजार में दोहरा की उपलब्धता कम होने से इसके दामों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय व्यापारिक और सामाजिक सूत्रों के अनुसार मांग के मुकाबले आपूर्ति घटने के कारण कीमतों में तेजी आई है।
स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दोहरा का सेवन गंभीर बीमारियों, विशेष रूप से मुंह के कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। इसमें तंबाकू और अन्य हानिकारक रसायनों का मिश्रण होता है, जो लंबे समय तक सेवन करने पर जानलेवा साबित हो सकता है।
एएसपी के विशेष अभियान में पकड़ी गई थी बड़ी खेप
हाल ही में अपर पुलिस अधीक्षक नगर आयुष श्रीवास्तव के निर्देशन में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान कोतवाली क्षेत्र के शकरमंडी इलाके में एक दुकान की आड़ में संचालित दोहरा निर्माण और बिक्री के अवैध कारोबार का खुलासा हुआ था। कार्रवाई के दौरान करीब 2 क्विंटल 34 किलो प्रतिबंधित दोहरा बरामद किया गया था तथा दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
वर्ष 2017 से प्रतिबंधित है दोहरा
उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (एफएसएसए) के तहत वर्ष 2017 से दोहरा के निर्माण, भंडारण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में इसकी अवैध बिक्री की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
सप्लाई नेटवर्क पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल खुदरा विक्रेताओं पर कार्रवाई करने के बजाय अवैध सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचना आवश्यक है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण, भंडारण और वितरण से जुड़े लोगों के खिलाफ निरंतर अभियान चलाया जाए तथा क्षेत्रीय स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।


