पूर्वांचल विश्वविद्यालय में ‘पृथ्वी, पर्यावरण एवं भविष्य’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान
जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग की ओर से ‘पृथ्वी, पर्यावरण एवं भविष्य’ विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें जल सुरक्षा, भूजल संरक्षण, मृदा अध्ययन और पृथ्वी के भू-वैज्ञानिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विद्यार्थियों और शोधार्थियों को जानकारी दी गई।
दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय, गया के भूविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह ने जल संसाधनों की वैश्विक और भारतीय स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी, शहरीकरण, औद्योगीकरण, भूजल के अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन से जल संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने वर्षाजल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
प्रो. सिंह ने कहा कि भू-आकृति, भूमि उपयोग, जल निकासी, भूगर्भीय संरचना और वर्षा जैसे कारकों के संयुक्त अध्ययन से भूजल पुनर्भरण की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकती है। उन्होंने रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बीपी सिंह ने मृदा को पृथ्वी के जलवायु और पर्यावरणीय इतिहास का महत्वपूर्ण प्राकृतिक अभिलेख बताया। उन्होंने मृदा और समस्थानिकों के अध्ययन से अतीत की जलवायु एवं पर्यावरणीय परिस्थितियों को समझने की जानकारी दी।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो. आरके सिंह का संदेश अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. प्रमोद यादव ने पढ़कर सुनाया। विषय प्रवर्तन प्रो. प्रदीप कुमार ने किया। स्वागत प्रो. मिथिलेश कुमार ने और संचालन अंजू यादव ने किया। आभार डॉ. नीरज अवस्थी ने जताया।


