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जौनपुर में जन्माष्टमी का उत्सव, मंदिरों से पुलिस लाइन और जिला जेल तक विशेष आयोजन

जौनपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर जिलेभर में उत्साह रहा। मंदिरों, पुलिस लाइन और जिला जेल में विशेष आयोजन हुए, जबकि बाजारों में लड्डू गोपाल की पोशाक और श्रृंगार सामग्री की मांग बढ़ी।
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Advocates created ruckus in Tehsil : ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने न्यायालय परिसर में लगी अधिवक्ताओं की कुर्सी हटवाया

आक्रोशित अधिवक्ताओं ने तहसील में किया हंगामा, नारेबाजी एवं धरना प्रदर्शन

जौनपुर धारा, मछलीशहर। उपजिला मजिस्ट्रेट सौरभ कुमार ने बुधवार की रात नई बिल्डिंग के बरामदे से अधिवक्ताओं की मेज, कुर्सी हटवा दिया गया। गुरुवार को सुबह तहसील खुलते ही आक्रोशित अधिवक्ताओं का समूह तहसील में हंगामा शुरू कर दिया। भारी संख्या में अधिवक्ता तहसील में नारेबाजी करते हुए मुख्य गेट बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए। सभी न्यायालयों में भी ताला लगवा दिया। जब उपजिला मजिस्ट्रेट की गाड़ी गेट पर आई तो अधिवक्ता उनके वाहन को घेर लिया गया और ‘वापस जाओ, वापस जाओ, की नारेबाजी करते हुए तहसील के अंदर जाने नहीं दिया। इसके बाद क्षेत्राधिकारी गिरेंद्र सिंह ने सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस सहित कई थानों की फोर्स बुलवा लिया। काफी मशक्कत के बाद उपजिला मजिस्ट्रेट को उनके कार्यालय में पैदल पहुंचाया गया। जबकि उनका वाहन काफी देर तक अधिवक्ताओं ने अंदर घुसने नहीं दिया बाद में ड्राइवर को गाड़ी मोड़ कर तहसील के पीछे के रास्ते से ले जाना पड़ा। उपजिला मजिस्ट्रेट ने अध्यक्ष जगदम्बा प्रसाद मिश्र एवं महामंत्री वेद प्रकाश श्रीवास्तव सहित संघ के पदाधिकारियों को वार्ता के लिए बुलाया तो अधिवक्ताओं ने नहीं जाने दिया। अधिवक्ताओं का आरोप था कि बिना कोई नोटिस दिए अधिवक्ताओं की मेज,कुर्सी रात के अंधेरे में बाहर फेकवा दिया गया। यह तानाशाही रवैया है। इसके साथ ही शासन के निर्देश पर भी तहसील से निकाले गए सभी प्राईवेट कर्मचारियों को वापस बुलाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। इसका विरोध अधिवक्ताओं ने किया तो बदले की भावना से कार्यवाही की जा रही है। भारी पुलिस फोर्स तैनात कर उपजिला मजिस्ट्रेट एवं उपजिलाधिकारी न्यायिक शैलेंद्र कुमार दिन में एक बजे न्यायालय में बैठे तो कोई अधिवक्ता न्यायालय के अंदर नहीं गया। जिससे न्यायालयीय कार्य नहीं हो सका। अधिवक्ता न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर दिया।इस बाबत उपजिला मजिस्ट्रेट का कहना है कि मैंने पहले ही अधिवक्ताओं से अतिक्रमण हटाने के लिए कह दिया था। बात न मानने पर मुझे स्वयं यह कार्यवाही करनी पड़ी। वहीं यदि अधिवक्ता न्यायिक कार्य में बाधा पहुंचाएंगे और सहयोग नहीं करेंगे तो उनके बिना ही पुलिस सुरक्षा में कोर्ट चलेगी।आसन्न संकट से निपटने के लिए तहसील के चप्पे चप्पे पर आधा दर्जन थाने की पुलिस फोर्स तैनात रही।