- लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति पूर्णत: समर्पित स्व.उमानाथ : कलराज मिश्र
- विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की उनमें अद्भुद क्षमता : गिरीश यादव
जौनपुर धारा, जौनपुर। बुधवार को टीडी कॉलेज के बलरामपुर हाल में स्व.उमानाथ सिंह की 29वीं पुण्यतिथि मनाई गयी। उक्त अवसर पर मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने उमानाथ सिंह स्मृति सेवा संस्थान के तत्वाधान में स्व.उमानाथ सिंह के नैतिक मूल्य, चारित्रिक दृढ़ता एवं संघर्षशीलता पर प्रकाश डाला। उन्होने कहा कि स्व.उमानाथ लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति पूर्णत: समर्पित रहे।

राज्यपाल ने कहा कि उमानाथ सिंह गोरखपुर आते जाते थे। वहीं संगठन कार्य के दौरान उनसे भेंट होती थी। उमानाथ सिंह से इतनी घनिष्ठता हो गयी कि जब भी वे जौनपुर आते तो उमानाथ सिंह के घर पर रूकते। उन्होने जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा समाचार पत्रों पर हल्ला बोल किया जा रहा था, जबरर्दस्ती दुकानों को बंद कराया और लूटा जा रहा था। जनता के मूल अधिकारों का दमन किया जा रहा था तब उमानाथ सिंह घर से बाहर निकले। कोतवाली में पहुंचे वहां कोतवाल से झड़प हुई वहीं हृदयाघात हो गया और वे कर्तव्य की बलिबेदी पर शहीद हो गये। मुख्य अभ्यागत ने कहा कि लोग मूल अधिकारों की बात तो करते हैं परंतु संविधान में वर्णित मूल कर्तव्यों की प्राय: उपेक्षा करते हैं। मूल कर्तव्यों के अर्न्तगत नारी सम्मान, राष्ट्र सेवा, अहिंसा, पर्यावरण संरक्षण, मर्यादापूर्ण आचरण जैसे जिन बिंदुओं पर चर्चा की गयी है वे सभी गुण स्व.उमानाथ सिंह के व्यक्तित्व में विद्यमान थे।
राज्यपाल ने कहा कि उमानाथ सिंह के दूसरे दलों के नेताओं से भी अच्छे संबंध थे। उनके व्यक्तित्व से राजनीति एवं समाज सेवा करने वालों के लिये मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिये। उन्होंने उमानाथ सिंह से संबंधित अनेक प्रसंगों का उल्लेख किया। समारोह में विशिष्ट अभ्यागत के रूप में पधारे राज्यमंत्री गिरीशचन्द्र यादव ने कहा कि उमानाथ सिंह का व्यक्तित्व विराट था। विपरीत परिस्थितियों में निर्णय लेने की उनमें अद्भुद क्षमता थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसी भी कोने में जाने पर वहां के लोग स्व.उमानाथ सिंह की चर्चा अवश्य करते थे। इससे उनके व्यक्तित्व का आंकलन किया जा सकता है। समारोह के दूसरे विशिष्ट अभ्यागत राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मन में स्व.उमानाथ सिंह के प्रति अटूट श्रद्धा रही होगी कि उन्होंने जौनपुर के मेडिकल कालेज का नामकरण ही उनके नाम पर कर दिया।समारोह की अध्यक्षता कर रही राज्यसभा सदस्य सीमा द्विवेदी ने कहा कि उमानाथ सिंह के निधन से जो स्थान रिक्त हुआ वह आज भी पूरा नहीं हो सका।

उन्होंने कहाकि स्व.उमानाथ के सानिध्य में कार्य नहीं कर पाने का दुख उन्हे आजीवन रहेगा। आंगन्तुकों का अभिवादन प्रतापगढ़ के पूर्व विधायक हरिप्रताप सिंह तथा समारोह संचालन पूर्व प्राचार्य डा. समर बहादुर सिंह ने किया। आभार ज्ञापन उमानाथ सिंह स्मृति सेवा संस्थान के सचिव एवं तिलकधारी महाविद्यालय के प्रबंधक राघवेन्द्र सिंह ने किया। स्व.उमानाथ सिंह के पुत्र पूर्व सांसद कृष्ण प्रताप सिंह केपी ने राज्यपाल को स्मृति चिह्न देकर उन्हें सम्मानित किया। उक्त अवसर पर पूर्व प्रमुख सुरेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक सुषम्ाा पटेल, विधायक रमेश सिंह, डा.धर्मराज सिंह, संत प्रसाद राय, वीरेन्द्र सिंह एडवोकेट, राजबहादुर सिंह, दुष्यंत सिंह, काली प्रसाद सिंह, भाजपा के जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह, सरदार सिंह, सुशील कुमार उपाध्याय, हरिश्चन्द्र सिंह, सभाजीत द्विवेदी प्रखर, डा.सूर्यप्रकाश सिंह मुन्ना, डा.राजीव प्रकाश सिंह, पूर्व प्राचार्य डा.उदयपाल सिंह, डा.राधेश्याम सिंह, काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो.वशिष्ठ अनूप, शिवेंद्र प्रताप सिंह, देवेन्द्र प्रताप सिंह, ओम प्रकाश सिंह, तिलकधारी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.आलोक सिंह सतिह आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहें।



