Become a member

Get the best offers and updates relating to Liberty Case News.

― Advertisement ―

spot_img
Homeअपना जौनपुरसाधना के लिये साधू बनना आवश्यक नहीं : पंकज महाराज

साधना के लिये साधू बनना आवश्यक नहीं : पंकज महाराज

बदलापुर। आपसी प्रेम, सौहार्द तथा सामाजिक समरसता का पाठ पढ़ाते हुये, प्रभु प्राप्ति की सरल साधना सिखाते जयगुरुदेव धर्म प्रचारक पंकज महाराज 109वें पड़ाव पर देनुआ घनश्यामपुर में सत्संग सन्देश सुनाया। उन्होने कहा कि यह अमोलक मानव तन है। यही मोक्ष पाने का साधन भी है। इसी शरीर में मरने से पहले सुरत शब्द की साधना करके प्रभु को पाया जा सकता है। जिन्होंने पाया उन्होंने मरने के पहले पाया। जिसका ज्वलन्त उदाहरण सन्तों की श्रंखला में सर्वप्रथम कबीरदास जी, नानक जी, दादू साहब, भीखा साहब, गोविन्द साहब, जगजीवन साहब, मीराबाई, सहजोबाई, राधास्वामी महाराज, दादा गुरु महाराज, हमारे गुरु महाराज और न जाने कितने जाने-अनजाने सन्त हैं। उन सन्तों ने ही इस मलीन युग में योग, यज्ञ, जप, तप जैसी कठिन साधना को निशेध करते हुये इस सरल साधना का भेद जारी किया। इसके लिये आपको साधू नहीं बनना, घर परिवार, बाल-बच्चे नहीं छोड़ना। घर गृहस्थी में रहकर चौबीस घण्टे में से घण्टा दो घण्टा समय निकाल कर इस मनुश्य मन्दिर में कुछ भजन की कमाई कर लो यही जीवन का सच्चा परमार्थ है। संस्थाध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में नवयुवकों में संस्कारों की कमी देखी जा रही है। संस्कार डिग्री या डिप्लोमा लेने से नहीं मिलते हैं। आज के समय में षिक्षा जरूरी है ये हम भी मानते हैं लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार भी जरूरी है। इस अवसर पर ऋषिदेव श्रीवास्तव, राम अकबाल प्रजापति, सूर्यबली सिंह, लालमणि मौर्य, धनन्जय, प्रमोद श्रीवास्तव, राम गरीब मिश्रा, डॉ.सालिक राम, गिरिडीह संगत से महेश्वर मुर्मू, किशुन हेमब्रह्म, हीरालाल आदि उपस्थित रहे।