जौनपुर धारा, जौनपुर। बदलापुर तहसील क्षेत्र के कुशहा द्वितीय गांव मे चल रही श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बालविदुषी दीक्षा हरिप्रिया शुक्ला ने भगवान श्रीकृष्ण के संपूर्ण जीवनवृत पर चर्चा की और इससे मिली सीख को अपने जीवन में उतारने की नसीहत दी। कथावाचक ने श्रीकृष्ण और उनके पुत्रों के बीच के एक प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार श्रीकृष्ण अपने पुत्रों के साथ ही जा रहे थे। इसी बीच एक कुंए में एक गिरगिट देख श्रीकृष्ण के पुत्र रुक गए। बच्चों ने तोतली आवाज में कहा कि कुंए में कोई बड़ा जानवर गिरा पड़ा है। भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन होते ही गिरगिट अपने स्वरूप में आ गया और कहा कि मैं राजा हूं और मैंने अपने जीवनकाल में सिर्फ दान किया। लेकिन एक छोटी सी गलती की वजह से आज मेरा स्वरूप बदल गया है। अपने अभिमान में मैंने एक ब्राह्माण का अपमान कर दिया। जिससे मेरी यह दुर्गति हुई। भगवान श्रीकृष्ण ने बच्चों को कहा कि सत्कर्म करना बेहद अच्छी बात है लेकिन अभिमान में चूर होना गलत। बालविदुषी दीक्षा हरिप्रिया शुक्ला ने श्रोताओं से कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम चंद्र की भांति भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सीख लेकर हम खुद के जन्म को धन्य बना सकते हैं और मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा से किसी भी जीव की सेवा करने वाले कभी दुख नहीं भोगते। कथा वाचन कार्यक्रम के अंतिम दिन कथा स्थल में श्रोताओं की भारी भीड़ उमड़ी।
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जौनपुर में जन्माष्टमी का उत्सव, मंदिरों से पुलिस लाइन और जिला जेल तक विशेष आयोजन
जौनपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर जिलेभर में उत्साह रहा। मंदिरों, पुलिस लाइन और जिला जेल में विशेष आयोजन हुए, जबकि बाजारों में लड्डू गोपाल की पोशाक और श्रृंगार सामग्री की मांग बढ़ी।
सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन

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