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Homeअपना जौनपुरबाबाजी के प्रति प्रेम तभी सार्थक है जब हम उनकी सिखलाईयो पर...

बाबाजी के प्रति प्रेम तभी सार्थक है जब हम उनकी सिखलाईयो पर चलें -सतगुरू माता

  • हृदय सम्राट सतगुरू बाबा हरदेव सिंह को समर्पित श्रद्धालुओं का श्रद्धा सुमन

जौनपुर धारा, जौनपुर।सतगुरू बाबा हरदेव सिंह के प्रति प्रेम तभी सार्थक है, जब हम उनकी सिखलाईयो पर चलें। हमें उनकी शिक्षाओं को केवल बोलचाल में ही नहीं अपितु उसे अपने वास्तविक जीवन में भी अपनाना है। सिखलाईयों के रूप में जो मोती हमें बाबा जी ने दिये उन्हें अपने जीवन में धारण करना है। प्रेम, समर्पण एवं गुरू के प्रति जो सत्कार है वह सच्चा हो न कि केवल दिखावा मात्र। अपना मन्थन हमें स्वयं करना है। प्रत्यक्ष को प्रमाण वाली बात कि हमारे जीवन में गुरू के प्रति प्रेम समर्पण का भाव सच्चा हो। केवल एक विशेष दिन के रूप में हम उन्हें याद न करके उनके द्वारा दी गयी सिखलाईयों से नित प्रेरणा लेते हुए, अपने जीवन को सार्थक बनाये। महात्मा मानिकचंद तिवारी (जोनल इंचार्ज) ने सतगुरू माता सुदीक्षा महाराज के पावन आशीष वचनों को बताते हुए संत निरंकारी सत्संग भवन पट्टीनरेंद्रपुर में विशाल रूप में एकत्रित हुए श्रद्धालुओं को व्यक्त किये। उन्होंने आगे कहा कि सतगुरू माता जी ने उदारहण सहित समझाया कि जिस प्रकार दूध में मधाणी मारने से केवल मलाई एवं मक्खन ही निकलेगा इसके विपरीत पानी में वह अवस्था बिलकुल भी संभव नहीं। अत: सच्ची भक्ति ईश्वर से जुड़कर ही प्राप्त हो सकती है तब ही हमारा मन प्रेम, सत्कार से सराबोर होगा और फिर गुरु के प्रति सच्ची प्रेमाभक्ति ही हृदय में उत्पन्न होगी इसीलिए यह आवश्यक है कि सत्गुरू का सच्चा संदेश केवल बोलचाल में ही न रह जाये। सतगुरु माता जी के प्रवचनों से पूर्व निरंकारी राजपिता ने अपने सम्बोधन में फरमाया कि बाबा का संपूर्ण जीवन ही उपकारों, वरदानों एवं मेहरबानियों से युक्त रहा। बाबा जी ने समूचे संसार में केवल प्रेम और अमन का ही दिव्य संदेश दिया। प्रेम का वास्तविक अर्थ हमें बाबा की सिखलाईयों से ही प्राप्त हुआ और उन्होनें सदैव प्रेम और अपनी दिव्य मुस्कुराहट से न केवल सभी को निहाल किया अपितु समूची मानव जाति के प्रति करूणा दया का भाव रखते हुए उनके जीवन को सार्थक किया। बाबा जी का यही दृष्टिकोण था कि जीवन में यदि प्रेम का भाव होगा तो झुकना सरल हो जायेगा। उनका यह मानना था कि ऊँचाईयो को ऐसे प्राप्त किया जाये कि माया का कोई भी दुष्प्रभाव गुरसिख पर न हो। बाबा जी ने पात्रता एवं प्रयास के भाव को न देखते हुए सभी के प्रति केवल समानता और करूणा वाला भाव ही दशार्या। अंत में निरंकारी राजपिता ने यही अरदास करी कि हम सभी का जीवन सतगुरू के कहे अनुसार ही निभ जाये। इस अवसर पर मड़ियाहू पड़ाव स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन सहित जिले के सभी निरंकारी सत्संग भवनों पर सत्संग का आयोजन हुआ। जिसमें सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने सम्मिलित होकर बाबा के परोपकारों को न केवल स्मरण किया अपितु हृदयपूर्वक श्रद्धा सुमन अर्पित किए। यह जानकरी स्थानीय मीडिया सहायक उदय नारायण जायसवाल ने दिया है।