- अधिकारियों के सांठगांठ के कारण नहीं होती कार्यवाही
- चोरी में मामलों में बिना मुकदमा दर्ज करे ही निपट जा रहा है केस
जौनपुर धारा, जौनपुर। शहर में बिजली की किल्लत और कटौती के बारे में छानबीन में चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। विद्युत निगम के अधिकारियों की सांठगांठ से जिले में बड़े पैमाने पर बिजली चोरी हो रही है। बिजली चोरी कराने में कई क्षेत्रों के लाइनमैन व जे.ई. तक की भूमिका अहम बताई जा रही है। ये बिजली चोरी कराने से लेकर अवैध वसूली तक का भी काम करते हैं। नगर के कुछ क्षेत्रों में अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ विजिलेंस टीम को भी नियमित छापेमारी करने की जरूरत है। शहर में बिजली की किल्लत और कटौती किसी से छिपी नहीं है। जून में कटौती इतनी बढ़ गई कि प्रदेश सरकार को निरीक्षण के लिए जिले में एक-एक नोडल अधिकारी भेजना पड़ा था। लेकिन जब तक बिजली चोरी में विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ रहेगी चोरी को नहीं रोका जा सकता। जौनपुर के अहियापुर उपखण्ड कार्यालय से जुड़े बिजली के एक-दो उपकेंद्र की खराब व्यवस्था पर एसडीओ से लेकर जेई तक जिम्मेदार बताये जा रहें है। विद्युत विभाग ने बिजली चोरी से जुड़े मामलों में संबंधित अभियंताओं के साथ ही बिजली थानों के अफसरों को भी तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिये थे। जिसमें चोरी जैसे मामलों में यदि 24 घंटे में एफआइआर दर्ज न हुई तो अब बिजली थानों के अफसरों पर भी कार्रवाई किये जाने का भी आदेश है। विद्युत अधिनियम-2003 के अनुसार 24 घंटे के अंदर विद्युत चोरी के मामले में एफआइआर दर्ज होना आवश्यक है, ऐसा न करने पर अवर अभियंता को दोषी बनाये जाने का नियम है। लेकिन जौनपुर में चोरी की घटनाएं पकड़ी तो जाती है लेकिन मामला ले दे कर सलट जाने तक ही सिमित रहता है। यही कारण है कि बिजली ओवरलोड़ की समस्याएं लगातार बनी हुई। अहियापुर केन्द्र के जुड़े लगभग सभी उपकेन्द्रों पर इन दिनों बिजली चोरी का खेल जोरों पर चल रहा है। आलम यह है कि बिजली बकाये पर लाइन काटने के एक घण्टे बाद ही बिना बिल जमा किये लाइन जोड़ दिया जाता है। यही नहीं लाइन जोड़ने का मौखिक आदेश एसडीओ और जे.ई.स्तर से होता है। विगत दिनों बिजली चेकिंग के दौरान कोतवाली और सिपाह फीडर से कई चोरी के मामले पकड़े गये, लेकिन बिना मुकदमा दर्ज किये ही मामले सलट गये। नगर के मुख्यमार्गों में कोतवाली फीडर के शाही किला के समीप गन्ने के रस की दुकान पर तो अभी भी चोरी की बिजली चलाई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शी बतातें है कि बिजली चोरी करने वाले के तार कोतवाली फीडर के जे.ई से जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि आस-पास चेकिंग होती रहती है लेकिन गन्ने के दुकान पर कोई नहीं पहुँच पाता है। यही नहीं कोतवाली फीडर के जे.ई.समस्याओं को सूनने तक के लिये सीयूजी नम्बर का फोन तक नहीं उठातें हैं।



